

सेकंड हैंड Tata Tiago बनाम Maruti Suzuki Swift: 2026 में कौन-सी हैचबैक ज़्यादा वैल्यू देती है?
- 1यूज़्ड Tata Tiago, यूज़्ड Maruti Suzuki Swift के मुकाबले काफ़ी सस्ती होती है
- 2चार साल में यूज़्ड Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift की वैल्यू करीब 40% घट जाती है
- 3पाँच साल में Tiago का सर्विस खर्च Swift की तुलना में काफ़ी कम रहता है
- मौजूदा रीसेल वैल्यू: सेकंड हैंड Tata Tiago बनाम सेकंड हैंड Maruti Suzuki Swift
- 5 साल में डिप्रिसिएशन रेट: इस्तेमाल की हुई Tata Tiago बनाम सेकंड हैंड Maruti Suzuki Swift
- इंजन विकल्प और ड्राइविंग अनुभव: टाटा टियागो बनाम मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट
- ड्राइविंग फील और परफॉर्मेंस से जुड़े अनुभव
- मेंटेनेंस लागत की तुलना: टाटा टियागो बनाम मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट
- मेंटेनेंस से जुड़े अहम निष्कर्ष
- निष्कर्ष
भारतीय कार बाज़ार में कई किफ़ायती और भरोसेमंद हैचबैक मौजूद हैं, जिनमें Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift दो बेहद लोकप्रिय मॉडल हैं। इस्तेमाल की हुई हैचबैक खरीदना पहली कार लेने का एक अच्छा तरीका है, और सेकंड हैंड Tata Tiago तथा इस्तेमाल की हुई Maruti Suzuki Swift—दोनों ही बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं।
यह तय करने के लिए कि आपको कौन-सी इस्तेमाल की हुई हैचबैक लेनी चाहिए, सेकंड हैंड Tata Tiago और इस्तेमाल की हुई Maruti Suzuki Swift की खूबियों और कमियों को समझना ज़रूरी है। इस लेख में हम दोनों कारों की औसत इस्तेमाल की हुई बिक्री कीमत, डिप्रिसिएशन, पावरट्रेन विकल्प और सर्विस इंटरवल पर नज़र डालते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-सी कार आपकी ज़रूरतों के ज़्यादा करीब है।
मौजूदा रीसेल वैल्यू: सेकंड हैंड Tata Tiago बनाम सेकंड हैंड Maruti Suzuki Swift
Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift एक ही सेगमेंट में आती हैं और साइज़ में भी काफ़ी हद तक समान हैं। हालांकि, नई Tata Tiago की एक्स-शोरूम कीमत Maruti Suzuki Swift से लगभग ₹1.5 लाख तक कम होती है। यही अंतर इस्तेमाल की हुई कारों के औसत बिक्री मूल्य और सेकंड हैंड मार्केट में उनकी न्यूनतम व अधिकतम कीमतों में भी साफ़ दिखाई देता है।

नोट: यहां दिखाए गए इस्तेमाल की हुई कारों के दाम 2014 मॉडल ईयर और उसके बाद की गाड़ियों के लिए हैं, जिनकी माइलेज 1 लाख किलोमीटर से कम है।
रीसेल वैल्यू से जुड़े अहम बिंदु
- इस्तेमाल की हुई Tata Tiago की औसत बिक्री कीमत Maruti Suzuki Swift से कम होती है: सेकंड हैंड Tata Tiago और इस्तेमाल की हुई Maruti Suzuki Swift की औसत कीमत में लगभग ₹40,000 का अंतर है।
- Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift की न्यूनतम इस्तेमाल की हुई कीमत लगभग समान है: इस्तेमाल की हुई Tata Tiago की सबसे कम कीमत ₹63,000 है, जो Maruti Suzuki Swift से सिर्फ ₹5,000 कम है। ये दोनों ही सेकंड हैंड कार मार्केट की सबसे सस्ती कारों में शामिल हैं।
- Maruti Suzuki Swift के लोअर वेरिएंट्स, Tata Tiago के मुकाबले ज़्यादा डिप्रिसिएट होते हैं: नई Tiago और Swift के बेस वेरिएंट्स की कीमत में ₹1.49 लाख का अंतर है। लेकिन सेकंड हैंड मार्केट में इनके बेस वेरिएंट्स के बीच सिर्फ ₹5,000 का फर्क रह जाता है।
- इस्तेमाल की हुई Maruti Suzuki Swift के टॉप वेरिएंट्स, Tata Tiago से ज़्यादा प्रीमियम पर बिकते हैं: सबसे महंगी इस्तेमाल की हुई Swift की कीमत ₹8.30 लाख तक जाती है, जबकि इस्तेमाल की हुई Tata Tiago अधिकतम ₹7.20 लाख तक मिलती है। Maruti Suzuki बैज के अलावा, इसका कारण Swift की बेहतर भरोसेमंदता और एफिशिएंसी भी है।
- Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift के टॉप वेरिएंट्स में नई और इस्तेमाल की हुई कीमतों का अंतर लगभग समान रहता है: नई Tata Tiago और नई Maruti Suzuki Swift के टॉप वेरिएंट्स में लगभग ₹1.20 लाख का अंतर है, और यही अंतर सेकंड हैंड मार्केट में भी देखने को मिलता है।
एक खरीदार के रूप में इसका आपके लिए क्या मतलब है
अगर आप अपनी कार को एक निवेश की तरह देख रहे हैं और भविष्य में बेचते समय ज़्यादा से ज़्यादा वैल्यू रिकवर करना चाहते हैं, तो सेकंड हैंड Swift आपके लिए बेहतर विकल्प होगी। Maruti Suzuki ब्रांड की वजह से ही यह प्रीमियम पर बिकती है और ओनरशिप के दौरान भी यह ज़्यादा एफिशिएंट और भरोसेमंद साबित होती है।
वहीं, अगर आप कम शुरुआती खर्च चाहते हैं और रीसेल वैल्यू को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित नहीं हैं, तो इस्तेमाल की हुई Tata Tiago आपके लिए सही रहेगी। कम बजट में आप इसका टॉप वेरिएंट ले सकते हैं, जिसमें बेहतर फीचर्स मिलते हैं और कुल मिलाकर ओनरशिप अनुभव भी बेहतर हो सकता है।
5 साल में डिप्रिसिएशन रेट: इस्तेमाल की हुई Tata Tiago बनाम सेकंड हैंड Maruti Suzuki Swift
डिप्रिसिएशन कार की रीसेल वैल्यू को धीरे-धीरे कम करने वाला सबसे बड़ा कारक होता है। हालांकि, यह हर कार में एक-सा नहीं होता। Tata Tiago और Maruti Suzuki Swift—दोनों अलग-अलग डिप्रिसिएशन दर से डिप्रिसिएट होती हैं। नीचे दिए गए सेक्शन में हमने इन दोनों हैचबैक की पांच साल की अवधि में डिप्रिसिएशन रेट को समझाया है।

डिप्रिसिएशन से जुड़े अहम निष्कर्ष
- पहले साल में डिप्रिसिएशन की दर लगभग समान रहती है: पहले साल में Tata Tiago थोड़ी ज़्यादा डिप्रिसिएट होती है (26.27%), जबकि Maruti Suzuki Swift भी पहले साल में लगभग 26% वैल्यू खो देती है।
- दूसरे साल में Tiago का डिप्रिसिएशन धीमा हो जाता है: दूसरे साल में Maruti Suzuki Swift (30%) की वैल्यू Tata Tiago (29.63%) से थोड़ी ज़्यादा गिरती है।
- तीसरे साल में Swift का डिप्रिसिएशन धीमा पड़ता है: इस साल Tata Tiago, Swift के मुकाबले 0.74% ज़्यादा तेज़ी से डिप्रिसिएट होती है। पांच साल की अवधि में यह दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर होता है।
- चौथे साल में Tiago अंतर कम करती है: चौथे साल में Tiago का डिप्रिसिएशन थोड़ा नियंत्रित होता है, हालांकि फिर भी यह Swift से ज़्यादा वैल्यू खोती रहती है।
- पांचवें साल में Swift फिर से अंतर बढ़ा देती है: पांचवें साल में Swift के डिप्रिसिएशन की रफ्तार एक बार फिर धीमी होती है, जिससे पांच साल की अवधि में Tiago के मुकाबले दूसरा सबसे बड़ा अंतर बनता है।
इंजन विकल्प और ड्राइविंग अनुभव: टाटा टियागो बनाम मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट
टाटा टियागो और मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट—दोनों में पेट्रोल इंजन मिलता है और इनके साथ सीएनजी का विकल्प भी उपलब्ध है।
टाटा टियागो के इंजन और ट्रांसमिशन विकल्प
- 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन – 5 स्पीड मैनुअल / 5 स्पीड एएमटी
- 1.2 लीटर पेट्रोल + सीएनजी इंजन – 5 स्पीड मैनुअल / 5 स्पीड एएमटी
मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट के इंजन और ट्रांसमिशन विकल्प
- 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन – 5 स्पीड मैनुअल / 5 स्पीड एएमटी
- 1.2 लीटर पेट्रोल + सीएनजी इंजन – 5 स्पीड मैनुअल
ड्राइविंग फील और परफॉर्मेंस से जुड़े अनुभव
- स्विफ्ट का पेट्रोल इंजन टियागो के मुकाबले थोड़ा ज़्यादा स्मूद महसूस होता है। दोनों ही तीन सिलेंडर इंजन होने के बावजूद, स्विफ्ट इंजन ज़्यादा आसानी से रेव करता है।
- स्विफ्ट के पुराने जनरेशन में चार सिलेंडर इंजन मिलता था, जो ड्राइव करने में साफ़ तौर पर ज़्यादा फुर्तीला था।
- ऑटोमैटिक चाहने वालों के लिए दोनों कारों में एएमटी का विकल्प मौजूद है। हालांकि, स्विफ्ट का एएमटी गियर शिफ्टिंग के मामले में टियागो से ज़्यादा स्मूद है।
- टियागो और स्विफ्ट—दोनों में सीएनजी विकल्प मिलते हैं। लेकिन सीएनजी स्विफ्ट सिर्फ मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है। वहीं, सीएनजी टियागो को मैनुअल और ऑटोमैटिक—दोनों विकल्पों में लिया जा सकता है।
- टियागो की राइड क्वालिटी ज़्यादा एब्ज़ॉर्बेंट है और यह हाईवे स्पीड पर भी ज़्यादा स्थिर महसूस होती है।
- हल्के वज़न और बेहतर वज़न वितरण की वजह से स्विफ्ट शहर के ट्रैफिक में ज़्यादा फुर्तीली लगती है।
मेंटेनेंस लागत की तुलना: टाटा टियागो बनाम मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट
किसी भी कार की ओनरशिप में मेंटेनेंस लागत की अहम भूमिका होती है, खासकर सेकंड हैंड कार के मामले में। नीचे दिए गए सेक्शन में हमने दोनों हैचबैक की मेंटेनेंस लागत की तुलना की है।
टाटा टियागो की मेंटेनेंस लागत

मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट की मेंटेनेंस लागत

मेंटेनेंस से जुड़े अहम निष्कर्ष
- अलग-अलग सर्विस इंटरवल: टाटा टियागो को हर 15,000 किलोमीटर पर सर्विस की ज़रूरत होती है, जबकि मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट को हर 10,000 किलोमीटर पर सर्विस करानी पड़ती है।
- टियागो की मेंटेनेंस लागत कम है: 5 साल की अवधि में टियागो की सर्विस लागत स्विफ्ट से लगभग ₹3,500 कम रहती है।
- प्रति किलोमीटर सर्विस खर्च भी टियागो में कम है: लंबे सर्विस इंटरवल की वजह से टियागो का प्रति किलोमीटर मेंटेनेंस खर्च स्विफ्ट के मुकाबले काफ़ी कम पड़ता है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो साल में 10,000 किलोमीटर से ज़्यादा ड्राइव करते हैं।
निष्कर्ष
नई टाटा टियागो की कीमत आमतौर पर नई मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट से कम होती है। यही बात इस्तेमाल की हुई कारों की कीमतों में भी दिखाई देती है। सेकंड हैंड टाटा टियागो की औसत, न्यूनतम और अधिकतम बिक्री कीमत—तीनों ही सेकंड हैंड मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट से कम रहती हैं। अगर आपका बजट सख़्त है, तो इस्तेमाल की हुई टियागो आपके लिए बेहतर विकल्प साबित होगी। लेकिन अगर आप कुछ साल बाद कार बेचने की योजना बना रहे हैं और ज़्यादा से ज़्यादा वैल्यू बनाए रखना चाहते हैं, तो सेकंड हैंड मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट चुनना सही रहेगा।
सेकंड हैंड टियागो की मेंटेनेंस लागत भी कम होती है और सर्विस इंटरवल के मामले में यह ज़्यादा लचीलापन देती है। अगर आप साल में करीब 15,000 किलोमीटर ड्राइव करते हैं, तो टियागो को मेंटेन करना स्विफ्ट के मुकाबले काफ़ी सस्ता पड़ता है। एक बार फिर, कम मेंटेनेंस खर्च चाहने वालों के लिए सेकंड हैंड टाटा टियागो बेहतर विकल्प है। हालांकि, सेकंड हैंड मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट लंबे समय में ज़्यादा भरोसेमंद साबित होती है।
अगर आप सेकंड हैंड कार लेने की सोच रहे हैं, तो ऐसी कार लेना बेहतर होता है जो अभी भी वारंटी पीरियड में हो। इसके अलावा, CARS24 के ज़रिये बेची जाने वाली हर इस्तेमाल की हुई कार पर 30 दिन या 1500 किलोमीटर की स्टैंडर्ड वारंटी मिलती है। साथ ही, CARS24 से इस्तेमाल की हुई टाटा टियागो या मारुति सुज़ुकी स्विफ्ट खरीदने पर आप 12 महीने या 15,000 किलोमीटर की एक्सटेंडेड वारंटी का विकल्प भी चुन सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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