

एक राज्य से दूसरे राज्य में गाड़ी का पंजीकरण स्थानांतरण कैसे करें: जानें पूरी प्रक्रिया
- 1RC ट्रांसफर न कराने पर आप कानूनी और वित्तीय रूप से जिम्मेदार रहेंगे।
- 2एक राज्य से दूसरे में ट्रांसफर के लिए पुराने राज्य का NOC अनिवार्य है।
- 3सभी जरूरी दस्तावेज़ ठीक से भरें और हस्ताक्षर करना न भूलें
- एक राज्य से दूसरे राज्य में RC स्थानांतरण क्यों ज़रूरी है?
- एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन पंजीकरण स्थानांतरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़
- एक ही राज्य में गाड़ी का RC ट्रांसफर कैसे करें?
- एक राज्य से दूसरे राज्य में गाड़ी का पंजीकरण स्थानांतरण कैसे करें?
- RC स्थानांतरण में कितना समय लगता है?
- ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन RC स्थानांतरण – क्या बेहतर है?
- रोड टैक्स रिफंड कैसे मिलता है?
- एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन स्थानांतरण की लागत कितनी आती है?
- विभिन्न राज्यों में वाहन का पंजीकरण स्थानांतरित करने की लागत
- विभिन्न राज्यों में रोड टैक्स और अतिरिक्त शुल्क
- मृत व्यक्ति की गाड़ी का स्वामित्व ट्रांसफर कैसे करें?
- नीलामी में खरीदे गए वाहन का स्वामित्व कैसे ट्रांसफर करें?
- वाहन का RC स्थानांतरण होने में कितना समय लगता है?
- RC ट्रांसफर की स्थिति कैसे जांचें?
- RC ट्रांसफर के दौरान ध्यान रखने योग्य ज़रूरी बातें
- CARS24 की आरटीओ सेवा कैसे मदद करती है?
- बोनस जानकारी: बार-बार ट्रांसफर वालों के लिए भारत श्रृंखला नंबर
यूं तो आप भारत के नागरिक हैं और आपका पहचान पत्र पूरे देश में मान्य है, और आप किसी भी राज्य या शहर में रहने के लिए स्वतंत्र हैं। पर गाड़ियों के केस में ऐसा नहीं है। अगर आप अपना दुपहिया या चौपहिया वाहन एक राज्य से दूसरे राज्य में लम्बे समय के लिए ले जाते हैं तो आपको अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन उस राज्य में ट्रांसफर करवाना पड़ेगा और ऐसा ना करने पर जुर्माना और कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।
Cars24 का अनुभव
अक्सर लोग गाड़ी बेचते समय या दूसरे राज्य में शिफ्ट होते वक्त यह मान लेते हैं कि सिर्फ़ गाड़ी सौंप देना ही काफी है। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) नए मालिक या नए राज्य में ट्रांसफर नहीं होता, तब तक कानूनी तौर पर आप ही उसके मालिक माने जाते हैं।
हमने CARS24 पर कई ऐसे मामले देखे हैं, जहाँ पुराने मालिक के नाम पर चालान आया, बीमा से जुड़ी परेशानी हुई या फिर दुर्घटना की जिम्मेदारी भी उसी पर डाल दी गई — सिर्फ इसलिए क्योंकि RC ट्रांसफर नहीं कराया गया था। इसीलिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि एक राज्य से दूसरे राज्य में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर कैसे किया जाता है, कौन-कौन से दस्तावेज़ लगते हैं और इसमें कितना समय व खर्च आता है।
एक राज्य से दूसरे राज्य में RC स्थानांतरण क्यों ज़रूरी है?
- अगर आप 12 महीने से ज़्यादा समय तक गाड़ी दूसरे राज्य में चलाते हैं
- अगर आपने गाड़ी किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति को बेच दी है
- अगर गाड़ी पर कोई दुर्घटना, अपराध या चालान हो जाए
इन सभी स्थितियों में पुराने RC धारक को ही जिम्मेदार माना जाता है, जब तक ट्रांसफर पूरा न हो।
Expert Tip:
गाड़ी बेचने के बाद RC ट्रांसफर की जिम्मेदारी केवल खरीदार पर छोड़ना सबसे बड़ी गलती होती है। सुरक्षित तरीका यही है कि विक्रेता खुद यह सुनिश्चित करे कि ट्रांसफर पूरा हुआ है।
एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन पंजीकरण स्थानांतरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़

नीचे दी गई तालिका में वे सभी दस्तावेज़ दिए गए हैं जो इस प्रक्रिया में अनिवार्य होते हैं:
| दस्तावेज़ का प्रकार | आवश्यक दस्तावेज़ |
| व्यक्तिगत दस्तावेज़ | पैन कार्ड (1 स्व-प्रमाणित प्रति) पता प्रमाण (1 स्व-प्रमाणित प्रति) पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो (2) |
| आरटीओ दस्तावेज़ (गाड़ी बेचते समय) | फॉर्म 28 (3 प्रतियाँ, चेसिस नंबर की छाप के साथ) फॉर्म 29 (2 प्रतियाँ) फॉर्म 30 (2 प्रतियाँ) फॉर्म 35 और बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (यदि कार लोन है) बिक्री हलफनामा क्लीयरेंस प्रमाण पत्र |
| गाड़ी से जुड़े दस्तावेज़ | मूल RC प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) वैध बीमा प्रमाण पत्र बीमा ट्रांसफर आवेदन (यदि लागू हो) |
| अतिरिक्त दस्तावेज़ | पुराने राज्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नए राज्य में रोड टैक्स भुगतान की रसीद |
एक ही राज्य में गाड़ी का RC ट्रांसफर कैसे करें?
अगर आप गाड़ी उसी राज्य के भीतर किसी दूसरे व्यक्ति को बेच रहे हैं, तो प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
- फॉर्म 29 और फॉर्म 30 प्राप्त करें
- खरीदार और विक्रेता दोनों की सही जानकारी भरें
- दोनों पक्षों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं
- वाहन को आरटीओ में निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करें
- नीचे दिए गए दस्तावेज़ जमा करें:
- फॉर्म 29 (2 प्रतियाँ)
- फॉर्म 30
- मूल RC
- बीमा प्रमाण पत्र
- प्रदूषण प्रमाण पत्र
- खरीदार का पता प्रमाण और फोटो
- ट्रांसफर शुल्क का भुगतान करें
सभी दस्तावेज़ सही पाए जाने पर आरटीओ नए मालिक के नाम से RC जारी कर देता है। अगर आप वाहन के रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया विस्तार से समझना चाहते हैं तो अभी लिंक पर क्लिक करें और पूरा आर्टिकल पढ़ें।
खर्च कितना आता है?
- ट्रांसफर शुल्क: लगभग ₹300
- स्मार्ट कार्ड और डाक शुल्क अलग से
Expert Tip:
अगर खरीदार RC ट्रांसफर में देरी कर रहा है, तो विक्रेता खुद आवेदन शुरू कर सकता है। इससे भविष्य की कानूनी जिम्मेदारी से बचाव होता है।
एक राज्य से दूसरे राज्य में गाड़ी का पंजीकरण स्थानांतरण कैसे करें?
यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है, लेकिन सही क्रम में करने पर कोई परेशानी नहीं आती।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
- पुराने राज्य के आरटीओ में फॉर्म 28 जमा करके अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करें
- यदि गाड़ी पर कार लोन है, तो बैंक से NOC अनिवार्य है
- पुलिस और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से क्लीयरेंस लें
- गाड़ी को नए राज्य में ले जाएँ
- नए राज्य के आरटीओ में ये दस्तावेज़ जमा करें:
- फॉर्म 29 (2 प्रतियाँ)
- फॉर्म 30
- मूल RC
- पुराने राज्य का NOC
- बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र
- खरीदार का पता प्रमाण और फोटो
- गाड़ी को निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करें
- रोड टैक्स और ट्रांसफर शुल्क जमा करें
इसके बाद नए राज्य का आरटीओ नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करता है।
RC स्थानांतरण में कितना समय लगता है?
एक ही राज्य में
- आमतौर पर 15 से 30 दिन
एक राज्य से दूसरे राज्य में
- पुराने राज्य से NOC: 15–30 दिन
- नए राज्य में रजिस्ट्रेशन: 20–30 दिन
- कुल समय: 30 से 60 दिन
Expert Tip:
सबसे ज़्यादा देरी पुराने राज्य से NOC मिलने में होती है। समय पर फॉलो-अप बहुत ज़रूरी है।
ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन RC स्थानांतरण – क्या बेहतर है?
ऑनलाइन प्रक्रिया
- फॉर्म भरना आसान
- स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है
- लेकिन निरीक्षण के लिए आरटीओ जाना ही पड़ता है
ऑफलाइन प्रक्रिया
- जटिल मामलों में ज़्यादा कारगर
- कार लोन, पता बदलाव जैसे मामलों में बेहतर
Expert Tip:
अगर मामला सीधा है, तो ऑनलाइन शुरुआत करें। लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्य के ट्रांसफर में ऑफलाइन तरीका ज़्यादा व्यावहारिक रहता है।
रोड टैक्स रिफंड कैसे मिलता है?
बहुत कम लोग जानते हैं कि पुराने राज्य का बचा हुआ रोड टैक्स वापस लिया जा सकता है।
- पुराने आरटीओ में आवेदन करें
- नए राज्य का RC और टैक्स रसीद संलग्न करें
- प्रक्रिया में 3–6 महीने लग सकते हैं
Expert Insight:
CARS24 के अनुभव में कई लोग ₹20,000 से ₹40,000 तक का रिफंड सिर्फ जानकारी के अभाव में छोड़ देते हैं।
एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन स्थानांतरण की लागत कितनी आती है?
एक राज्य से दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर करने पर मुख्य खर्च रोड टैक्स, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), गैर-प्रवासन प्रमाण पत्र (NMC) और आरटीओ शुल्क का होता है। यह लागत राज्य, गाड़ी की कीमत और ईंधन प्रकार पर निर्भर करती है।
आम भाषा में समझें: खर्च क्यों बदल जाता है?
जब आप गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में रजिस्टर कराते हैं, तो नया राज्य यह मानता है कि अब गाड़ी वहीं उपयोग होगी।
इसी कारण:
- नए राज्य में रोड टैक्स दोबारा देना पड़ता है
- पुराने राज्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होता है
- कुछ राज्यों में गैर-प्रवासन प्रमाण पत्र (NMC) भी मांगा जाता है
हमने CARS24 के अनुभव में देखा है कि ज़्यादातर लोग सिर्फ ट्रांसफर फीस का अंदाज़ा लगाते हैं, लेकिन रोड टैक्स असली बड़ा खर्च बनकर सामने आता है।
विभिन्न राज्यों में वाहन का पंजीकरण स्थानांतरित करने की लागत
नीचे दी गई तालिका में अलग-अलग राज्यों में NMC, NOC और उनकी वैधता की जानकारी दी गई है:
| राज्य | एनएमसी राशि (₹ में) | वैधता (दिनों में) | एनओसी रद्द करने की राशि (₹ में) | वैधता (दिनों में) |
| दिल्ली | 5,000 | 30 | 5,000 | 30 |
| हरियाणा | 1,500 | 7 | 3,000 | 10 |
| उत्तर प्रदेश | 10,000 | 7 | 7,000 | 10 |
| महाराष्ट्र | 3,000 | 7 | – | 10 |
| कर्नाटक | 6,500* | 7 | 12,500* | 10 |
| हैदराबाद | 3,000 | 7 | 4,000 | 10 |
* राज्यों के अनुसार कर में बदलाव संभव है।
Expert Tip:
कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में शुल्क सबसे ज़्यादा होता है। वहां शिफ्ट करने से पहले कुल खर्च का अनुमान ज़रूर लगा लें।
विभिन्न राज्यों में रोड टैक्स और अतिरिक्त शुल्क
यहाँ असली खर्च सामने आता है। रोड टैक्स आमतौर पर गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत और ईंधन प्रकार के आधार पर लिया जाता है।
| राज्य | रोड टैक्स (पेट्रोल) | रोड टैक्स (डीज़ल) | अतिरिक्त शुल्क |
| आंध्र प्रदेश | ₹10 लाख से कम – 12% ₹10 लाख से ज़्यादा – 14% | ₹10 लाख से कम – 12% ₹10 लाख से ज़्यादा – 14% | दूसरी गाड़ी खरीदने पर +2% अतिरिक्त आरटीओ टैक्स |
| चंडीगढ़ | ₹20 लाख से कम – 6% ₹20 लाख से ज़्यादा – 8% | ₹20 लाख से कम – 6% ₹20 लाख से ज़्यादा – 8% | – |
| दिल्ली | ₹6 लाख से कम – 4% ₹6–10 लाख – 7% ₹10 लाख से ज़्यादा – 10% | ₹6 लाख से कम – 5% ₹6–10 लाख – 8.75% ₹10 लाख से ज़्यादा – 12.5% | नगर निगम पार्किंग शुल्क ₹4 लाख से कम – ₹2,000 ₹4 लाख से अधिक – ₹4,000 |
| हरियाणा | ₹6 लाख से कम – 5% ₹6–20 लाख – 8% ₹20 लाख से ज़्यादा – 10% | ₹6 लाख से कम – 5% ₹6–20 लाख – 8% ₹20 लाख से ज़्यादा – 10% | क्षेत्रीय आधार पर शुल्क |
| कर्नाटक | ₹5 लाख से कम – 15% ₹5–10 लाख – 16% ₹10–20 लाख – 19% ₹20 लाख से ज़्यादा – 20% | ₹5 लाख से कम – 15% ₹5–10 लाख – 16% ₹10–20 लाख – 19% ₹20 लाख से ज़्यादा – 20% | – |
| महाराष्ट्र | ₹10 लाख से कम – 9% ₹10–20 लाख – 10% ₹20 लाख से ज़्यादा – 11% | ₹10 लाख से कम – 11% ₹10–20 लाख – 12% ₹20 लाख से ज़्यादा – 13% | सीएनजी गाड़ियों के लिए कम टैक्स |
| पंजाब | सभी गाड़ियों के लिए – 6% | सभी गाड़ियों के लिए – 6% | – |
| उत्तर प्रदेश | ₹10 लाख से कम – 8% | ₹10 लाख से कम – 8% | अतिरिक्त शुल्क लागू हो सकते हैं |
Expert Tip:
अगर आप दिल्ली, कर्नाटक या महाराष्ट्र जा रहे हैं, तो रोड टैक्स पहले ही गणना कर लें। कई बार यह ₹50,000 से भी ऊपर चला जाता है।
मृत व्यक्ति की गाड़ी का स्वामित्व ट्रांसफर कैसे करें?
मृत व्यक्ति की गाड़ी को परिवार के सदस्य के नाम ट्रांसफर कराने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र और फॉर्म 31 के साथ आरटीओ में आवेदन करना होता है। सभी दस्तावेज़ सत्यापित होने पर नई आरसी जारी होती है।
आम भाषा में समझें प्रक्रिया
अगर परिवार के किसी सदस्य का निधन हो गया है और उनके नाम पर गाड़ी रजिस्टर्ड है, तो उसे चलाते रहना या बेचना कानूनी रूप से सही नहीं माना जाता, जब तक स्वामित्व ट्रांसफर न हो। यह प्रक्रिया थोड़ी भावनात्मक और कागज़ी दोनों हो सकती है, लेकिन सही क्रम में करने पर कोई दिक्कत नहीं आती।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- सबसे पहले मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें
- इसके बाद कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र लें
- एक हलफनामा तैयार करें जिसमें उत्तराधिकारी होने की घोषणा हो
- फॉर्म 31 भरें (स्वामित्व ट्रांसफर हेतु)
आरटीओ में जमा करने वाले दस्तावेज़
- फॉर्म 31
- गाड़ी का मूल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- मृत्यु प्रमाण पत्र
- कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र
- वैध बीमा प्रमाण पत्र
- प्रदूषण प्रमाण पत्र
- उत्तराधिकारी का पता प्रमाण
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
इन दस्तावेज़ों के साथ लगभग ₹300 का ट्रांसफर शुल्क जमा करना होता है (राज्य के अनुसार राशि थोड़ी बदल सकती है)।
सभी दस्तावेज़ सत्यापित होने के बाद नई आरसी उत्तराधिकारी के नाम जारी कर दी जाती है।
Expert Tip:
अगर एक से ज़्यादा कानूनी उत्तराधिकारी हैं, तो सभी की सहमति का हलफनामा लगाना बेहतर रहता है, वरना भविष्य में विवाद हो सकता है।
नीलामी में खरीदे गए वाहन का स्वामित्व कैसे ट्रांसफर करें?
अगर आपने किसी सार्वजनिक नीलामी में वाहन खरीदा है, तो उसे अपने नाम पर चलाने के लिए आरटीओ में स्वामित्व ट्रांसफर कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए नीलामी प्रमाण पत्र, फॉर्म 32 और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होते हैं।
Cars24 का अनुभव
कई लोग बैंक, सरकारी विभाग या अदालत द्वारा कराई गई नीलामी से वाहन खरीदते हैं, क्योंकि वहाँ कीमत आमतौर पर बाज़ार से कम होती है। लेकिन नीलामी में वाहन खरीदने के बाद सबसे अहम काम होता है — उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपने नाम पर ट्रांसफर कराना।
हमने CARS24 के अनुभव में देखा है कि नीलामी में खरीदे गए कई वाहनों को लोग महीनों तक बिना ट्रांसफर कराए चला लेते हैं, जो आगे चलकर बीमा, चालान और कानूनी जिम्मेदारी की बड़ी समस्या बन जाता है।
नीलामी में खरीदी गई गाड़ी का स्वामित्व ट्रांसफर करने की प्रक्रिया
अगर आपने किसी सार्वजनिक नीलामी में वाहन खरीदा है, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को सही क्रम में पूरा करना ज़रूरी है।
स्टेप 1: नीलामी प्रमाण पत्र प्राप्त करें
सबसे पहले नीलामी आयोजित करने वाली संस्था से आधिकारिक नीलामी प्रमाण पत्र लें। यह दस्तावेज़ यह साबित करता है कि आपने वाहन वैध तरीके से नीलामी में खरीदा है।
Expert Tip:
बिना नीलामी प्रमाण पत्र के आरटीओ में आवेदन करने पर फाइल सीधी अस्वीकार हो सकती है।
स्टेप 2: फॉर्म 32 भरें
इसके बाद फॉर्म 32 भरना होता है। यह फॉर्म खासतौर पर नीलामी में खरीदे गए वाहन का स्वामित्व नए खरीदार के नाम ट्रांसफर करने के लिए होता है।
- इसमें नीलामी की जानकारी
- खरीदार का विवरण
- वाहन की पूरी जानकारी
भरनी होती है। यह फॉर्म आप आरटीओ कार्यालय से या ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त कर सकते हैं।
आरटीओ में जमा करने वाले दस्तावेज़
नीचे दिए गए सभी दस्तावेज़ पूरे और सही होने चाहिए:
- फॉर्म 32
- वाहन का मूल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि वाहन मृत व्यक्ति की संपत्ति से नीलाम हुआ हो)
- कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
- वैध बीमा प्रमाण पत्र
- प्रदूषण प्रमाण पत्र
- खरीदार का पता प्रमाण
- खरीदार की पासपोर्ट साइज फोटो
स्टेप 3: वाहन का निरीक्षण
सभी दस्तावेज़ जमा करने के बाद आपको वाहन को आरटीओ में निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करना होगा। इस दौरान चेसिस नंबर, इंजन नंबर और काग़ज़ों का मिलान किया जाता है।
स्टेप 4: शुल्क का भुगतान
- स्वामित्व ट्रांसफर शुल्क: लगभग ₹300
(यह राशि राज्य के अनुसार थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है)
दस्तावेज़ सत्यापित होने के बाद नया RC खरीदार के नाम जारी कर दिया जाता है।
Expert Tip:
नीलामी वाले मामलों में आरटीओ अक्सर अतिरिक्त जांच करता है, इसलिए दस्तावेज़ बिल्कुल साफ और पूरे रखें।
वाहन का RC स्थानांतरण होने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर नीलामी में खरीदे गए वाहन का RC ट्रांसफर:
- 60 से 90 कार्य दिवस में पूरा होता है
समय इन बातों पर निर्भर करता है:
- दस्तावेज़ पूरे हैं या नहीं
- आरटीओ में लंबित मामलों की संख्या
- अतिरिक्त सत्यापन की ज़रूरत
Expert Insight:
नीलामी से जुड़े मामलों में समय थोड़ा ज़्यादा लगता है, इसलिए जल्दबाज़ी में वाहन चलाने से बचें।
RC ट्रांसफर की स्थिति कैसे जांचें?
आप घर बैठे RC ट्रांसफर की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं।
स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:
- परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
- “ऑनलाइन सेवाएं” विकल्प चुनें
- “वाहन संबंधी सेवाएं” पर क्लिक करें
- राज्य और आरटीओ चुनें
- “आवेदन की स्थिति जानें” विकल्प पर जाएँ
- आवेदन संख्या भरें और सबमिट करें
स्क्रीन पर आपको RC ट्रांसफर की वर्तमान स्थिति दिख जाएगी।
RC ट्रांसफर के दौरान ध्यान रखने योग्य ज़रूरी बातें
1) राज्य बदलने पर टैक्स और नियम बदल जाते हैं
हर राज्य का रोड टैक्स अलग होता है। दिल्ली जैसे राज्यों में नगर निगम पार्किंग शुल्क भी लिया जाता है।
Expert Tip:
नए राज्य में पहुंचने से पहले रोड टैक्स का अनुमान लगा लें, ताकि अचानक बड़ा खर्च न आए।
2) पुराने वाहन नंबर को बनाए रखने का विकल्प
कुछ मामलों में आप पुराना वाहन नंबर रख सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह आरटीओ की अनुमति और उपलब्धता पर निर्भर करता है।
3) समयसीमा का पालन बहुत ज़रूरी है
- समय पर दस्तावेज़ जमा करें
- शुल्क समय पर भरें
- अतिरिक्त जांच में सहयोग करें
देरी होने पर जुर्माना या कानूनी परेशानी हो सकती है।
4) आरटीओ से संपर्क बनाए रखें
पुराने और नए — दोनों राज्यों के आरटीओ से संपर्क में रहना फायदेमंद होता है। किसी भी स्थिति में आरटीओ ही सबसे भरोसेमंद जानकारी देता है।
5) बीमा और रोड टैक्स की जानकारी अपडेट करें
RC ट्रांसफर पूरा होने के बाद:
- बीमा पॉलिसी में नया रजिस्ट्रेशन विवरण अपडेट करवाएं
- नई बीमा प्रति अपने पास रखें
6) अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की वैधता समझें
- सामान्यतः NOC की वैधता 3 से 6 महीने होती है
- तय समय में प्रक्रिया पूरी न होने पर नया NOC बनवाना पड़ सकता है
CARS24 की आरटीओ सेवा कैसे मदद करती है?
RC ट्रांसफर की प्रक्रिया अक्सर थकाने वाली होती है, खासकर तब जब पार्टी पेशी के लिए आरटीओ बुलाया जाए।
पार्टी पेशी में आरटीओ यह सुनिश्चित करता है कि आप वाहन बेचने या ट्रांसफर करने के लिए अधिकृत हैं।
CARS24 की आरटीओ सेवाएं:
- दस्तावेज़ों की पूरी जांच
- आरटीओ अपॉइंटमेंट की व्यवस्था
- ज़रूरत पड़ने पर घर से सहायता
जहाँ आम एजेंट सिर्फ दस्तावेज़ों के लिए ₹7,000 तक लेते हैं, वहीं CARS24 पर पूरी सेवा लगभग ₹3,000 में मिल सकती है।
बोनस जानकारी: बार-बार ट्रांसफर वालों के लिए भारत श्रृंखला नंबर
अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें बार-बार राज्य बदलना पड़ता है, तो आप अपनी गाड़ी के लिए भारत श्रृंखला (BH) नंबर ले सकते हैं।
- यह नंबर पूरे भारत में मान्य होता है
- बार-बार RC ट्रांसफर की झंझट से छुटका
- रोड टैक्स किस्तों में देने की सुविधा
Expert Tip:
केन्द्र सरकार के कर्मचारी और निजी कंपनियों के अखिल भारतीय ट्रांसफर वाले कर्मचारी इस विकल्प को ज़रूर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सभी को बड़ा करें

























