

सेकंड हैंड Maruti Suzuki Ignis खरीदने से पहले जानें: फायदे, नुकसान और आम समस्याएं
- 1Maruti Ignis, जो 2017 में आई थी, एक स्टाइलिश और यूथ-ओरिएंटेड हैचबैक है
- 2यह गाड़ी स्पेशियस, भरोसेमंद, फ्यूल-एफिशिएंट है और इसकी स्टाइलिंग भी अलग है
- 3खरीदते समय AMT, सस्पेंशन की आवाज़, इंफोटेनमेंट ग्लिच और बैटरी समस्या पर नज़र रखें
Maruti Suzuki Ignis एक भरोसेमंद, शहर के अनुकूल हैचबैक है, जिसमें SUV से प्रेरित लुक मिलता है और जो एक अलग पहचान रखती है—ऐसी पहचान जो साफ़ तौर पर Maruti की झलक देती है। इसमें वही 1.2L K12 पेट्रोल इंजन मिलता है, जो Swift और Baleno जैसे लोकप्रिय मॉडलों में भी दिया जाता है। इसका tall-boy स्टांस 180mm के ग्राउंड क्लीयरेंस से आता है, जो ज़्यादातर भारतीय हैचबैक से ज़्यादा है।
ये सारी खूबियाँ, साथ ही Automatic Gear Shift (AGS) तकनीक की सुविधा, Ignis को सेकेंड-हैंड कार बाज़ार में एक काफ़ी पसंद किया जाने वाला विकल्प बनाती हैं। लेकिन किसी सेकंड हैंड Maruti Suzuki Ignis को घर लाने से पहले कुछ और बातों को जानना भी ज़रूरी है। आगे पढ़ते रहिए, क्योंकि यहाँ हम विस्तार से बताएँगे कि Ignis किन मामलों में अच्छी साबित होती है, कहाँ यह थोड़ी कमज़ोर पड़ती है और इस हैचबैक में लोगों को आमतौर पर किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
Maruti Suzuki Ignis पर एक नज़र
भारत में 2017 में लॉन्च हुई Ignis, Maruti की उस कोशिश का हिस्सा थी जिसके ज़रिए वह युवा और स्टाइल को अहमियत देने वाले ग्राहकों को आकर्षित करना चाहती थी। इसमें अलग तरह की डिज़ाइन, चटख़ रंग और एक अनोखी पर्सनैलिटी देखने को मिली। शुरुआत में Ignis को Maruti के प्रीमियम NEXA चैनल के ज़रिए बेचा गया, जिससे इसे Swift या WagonR जैसी कारों से थोड़ा ज़्यादा प्रीमियम स्थान मिला।
इसके अलावा, 2020 में Ignis को हल्का-सा फ़ेसलिफ़्ट भी मिला, जिसमें नया ग्रिल और BS6 मानकों के अनुरूप इंजन दिया गया। इससे गाड़ी की रिफ़ाइनमेंट और उत्सर्जन स्तर में सुधार हुआ। फ़ायदे, कमियाँ और आम समस्याओं पर जाने से पहले, नीचे इसकी मुख्य जानकारी पर एक नज़र डालते हैं।
मुख्य जानकारी
| पहलू | विवरण |
| लॉन्च वर्ष (भारत) | 2017 (2020 में फ़ेसलिफ़्ट) |
| बॉडी टाइप | कॉम्पैक्ट हैचबैक / क्रॉसओवर |
| इंजन | 1.2L K12 पेट्रोल (1197cc, 4-सिलेंडर) |
| ट्रांसमिशन विकल्प | 5-स्पीड मैनुअल / 5-स्पीड AMT |
| माइलेज (ARAI) | ~20.8 km/l (मैनुअल) / ~20.9 km/l (AMT) |
| पावर | 82 PS @ 6000 rpm |
| टॉर्क | 113 Nm @ 4200 rpm |
| सीटिंग क्षमता | 5 यात्री |
| बूट स्पेस | 260 लीटर |
| ग्राउंड क्लीयरेंस | 180 mm |
| सेफ़्टी फ़ीचर्स | डुअल एयरबैग, ABS with EBD, ISOFIX माउंट्स (सभी वेरिएंट्स में) |
| इंफोटेनमेंट (ऊँचे वेरिएंट्स) | 7-इंच SmartPlay Studio टचस्क्रीन, Android Auto और Apple CarPlay |
| उपलब्ध वेरिएंट्स | Sigma, Delta, Zeta, Alpha (Delta, Zeta और Alpha में AMT) |
| क़ीमत (used मार्केट, 2017–2022 मॉडल) | ₹3.5 – ₹6.8 लाख, वेरिएंट और कंडीशन के अनुसार |
सेकेंड-हैंड Maruti Suzuki Ignis ख़रीदने के फ़ायदे
Ignis ख़रीदने से पहले इसके कुछ बड़े फ़ायदों को जानना ज़रूरी है।
1. छोटी लेकिन अंदर से काफ़ी खुली
Ignis बाहर से भले ही छोटी दिखती हो, लेकिन अंदर बैठने पर यह काफ़ी जगहदार महसूस होती है। SUV जैसी ऊँचाई की वजह से हेडरूम अच्छा मिलता है और गाड़ी में चढ़ना-उतरना भी आसान रहता है, ख़ासकर लंबे कद वाले लोगों के लिए। इंटीरियर सलीके से डिज़ाइन किया गया है, लेगरूम भरपूर है और 260 लीटर का बूट स्पेस रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए ठीक-ठाक है।
2. मज़बूत Maruti पहचान
Maruti Suzuki की पहचान भरोसेमंद कारों के लिए है और Ignis भी इसी पर खरी उतरती है। इसका 1.2L पेट्रोल इंजन किफ़ायती, स्मूद और कम मेंटेनेंस वाला है। इसके स्पेयर पार्ट्स देशभर में आसानी से और सस्ते में मिल जाते हैं। यही वजह है कि एक used Ignis को ठीक कराना भी आसान और जेब पर हल्का रहता है।
3. अच्छा माइलेज
Maruti की कारें हमेशा से माइलेज के लिए जानी जाती रही हैं और Ignis भी इसमें पीछे नहीं है। असली ड्राइविंग हालात में यह 16–20 kmpl तक का माइलेज दे देती है, जो शहर में चलाने और कभी-कभार हाईवे ड्राइव के लिए काफ़ी ठीक है।
4. अलग दिखने वाला स्टाइल
इस सेगमेंट की ज़्यादातर हैचबैक एक जैसी दिखती हैं। Ignis अपने रेट्रो-चिक ज्योमेट्रिक डिज़ाइन, उभरे हुए व्हील आर्च और अलग तरह के रियर लुक की वजह से भीड़ से अलग नज़र आती है। इसका लुक सभी को पसंद आए, यह ज़रूरी नहीं, लेकिन अगर आपको कुछ हटकर पसंद है और रंगों के विकल्प भी चाहिए, तो Ignis एक अच्छा चुनाव हो सकती है।
5. टॉप वेरिएंट्स में भरपूर फ़ीचर्स
used Ignis के ऊँचे वेरिएंट्स (Zeta और Alpha) में काफ़ी अच्छे फ़ीचर्स मिलते हैं, जैसे:
- टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, Android Auto और Apple CarPlay के साथ
- रियर कैमरा और पार्किंग सेंसर्स
- LED प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स और DRLs
- डुअल एयरबैग और ABS
- अलॉय व्हील्स, पुश-बटन स्टार्ट और कई अन्य सुविधाएँ
इस्तेमाल की हुई Maruti Suzuki Ignis की कमियाँ
हालाँकि Ignis एक किफ़ायती और समझदारी भरा विकल्प है, फिर भी कुछ मामलों में यह पीछे रह जाती है।
1. AMT गियरबॉक्स का झटका
अगर आप AMT (ऑटोमैटिक) वेरिएंट देख रहे हैं, तो उसे अच्छी तरह चला कर ज़रूर देखें। ट्रैफ़िक में रुक-रुक कर चलते समय गियर बदलते वक्त हल्का झटका महसूस हो सकता है। यह हर किसी के लिए बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन अगर आप बहुत स्मूद गियरशिफ़्ट चाहते हैं, तो मैनुअल वेरिएंट ज़्यादा बेहतर लग सकता है।
2. लुक सबको पसंद नहीं आता
कुछ लोग इसके डिज़ाइन को पसंद करते हैं, तो कुछ को यह ज़्यादा बॉक्सी या अजीब लगती है। अगर आपको सादा और ज़्यादा लोकप्रिय लुक चाहिए, तो Swift या Baleno ज़्यादा भा सकती है।
3. ड्राइविंग शौकीनों के लिए नहीं
Ignis रोज़मर्रा की ड्राइविंग के लिए अच्छी है, लेकिन अगर आपको तेज़ रफ़्तार या तीखे मोड़ों पर मज़ेदार हैंडलिंग पसंद है, तो यह थोड़ी नरम महसूस हो सकती है। इसका सस्पेंशन आराम के लिए सेट किया गया है, न कि ज़्यादा स्पोर्टी ड्राइव के लिए।
4. used मार्केट में थोड़ी महँगी
NEXA प्रोडक्ट होने की वजह से कई डीलर पुराने Ignis मॉडल्स के लिए भी प्रीमियम माँगते हैं। अलग-अलग शहरों और लिस्टिंग्स में क़ीमतों की तुलना ज़रूर करें, ताकि ज़्यादा दाम न चुकाने पड़ें।
इस्तेमाल की हुई Ignis में ध्यान देने वाली आम समस्याएँ
यह वह हिस्सा है जहाँ आपको ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए। Ignis एक अच्छी हैचबैक है, लेकिन समय के साथ कुछ दिक़्क़तें सामने आ सकती हैं।
1. AMT ट्रांसमिशन का घिसाव
अगर आप ऐसी AMT Ignis देख रहे हैं जो 40,000–50,000 km से ज़्यादा चली हो, तो गियर बदलते समय देरी या एक्सेलेरेशन पर झटके जाँचें। क्लच एक्टुएटर पर ध्यान देने की ज़रूरत पड़ सकती है, और इसे बदलने का ख़र्च लगभग ₹12,000–₹15,000 तक जा सकता है।
2. सस्पेंशन से आवाज़ें
ख़राब सड़कों पर चलते समय सस्पेंशन से ठक-ठक या खड़खड़ की आवाज़ आए, तो सावधान हो जाइए। स्ट्रट्स या बुशिंग्स जल्दी घिस सकती हैं और इन्हें बदलने में ₹5,000–₹7,000 तक का ख़र्च आ सकता है।
3. इंफोटेनमेंट सिस्टम की दिक़्क़तें
पुराना SmartPlay इंफोटेनमेंट सिस्टम कभी-कभी हैंग या फ़्रीज़ हो सकता है। ज़्यादातर मामलों में सॉफ़्टवेयर अपडेट से समस्या हल हो जाती है, लेकिन वारंटी खत्म होने पर पूरा यूनिट बदलना पड़े तो ख़र्च ₹20,000 के आसपास जा सकता है।
4. इंटीरियर प्लास्टिक की क्वालिटी
ख़ासकर निचले वेरिएंट्स में इंटीरियर प्लास्टिक समय के साथ जल्दी खरोंच खा सकता है और आवाज़ करने लगता है। यह दिखावट से जुड़ी समस्या है, लेकिन केबिन के कुल अनुभव को थोड़ा फीका कर देती है।
5. बैटरी और इलेक्ट्रिकल जाँच
कई Ignis मालिकों ने शुरुआती समय में बैटरी ड्रेन और छोटे-मोटे इलेक्ट्रिकल फ़ॉल्ट्स की शिकायत की है, जैसे पावर विंडो का काम न करना या सेंसर से जुड़ी गड़बड़ियाँ। ख़रीद से पहले पूरी इलेक्ट्रिकल जाँच या अच्छी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन कराना हमेशा समझदारी होती है।
फ़ैसला: क्या इस्तेमाल की हुई Ignis लेना सही है?
हाँ, लेकिन तभी जब आप सही कार चुनें। एक सेकेंड-हैंड Maruti Suzuki Ignis आपको अलग लुक, शहर के लिए अनुकूल ड्राइव और Maruti की भरोसेमंद पहचान देती है। यह ख़ासकर पहली बार कार ख़रीदने वालों, छात्रों या शहर में दूसरे वाहन की ज़रूरत रखने वालों के लिए बढ़िया विकल्प है।
बस बहुत ज़्यादा चली हुई AMT गाड़ियों, असामान्य रूप से सस्ती लिस्टिंग्स या अधूरी सर्विस हिस्ट्री वाली कारों से बचें। गाड़ी की ठीक से जाँच करें, किसी अनुभवी मैकेनिक की राय लें, और संभावना है कि आप एक मज़बूत, किफ़ायती और संतोषजनक हैचबैक लेकर घर लौटेंगे।
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