

Torque Converter क्या होता है? कैसे काम करता है और बेस्ट कारें कौन-सी हैं
- 1टॉर्क कन्वर्टर इंजन से मिलने वाले ज़्यादा टॉर्क को आसानी से संभाल सकते हैं
- 2कम स्पीड पर टॉर्क कन्वर्टर गियरबॉक्स बेहद स्मूद रहते हैं
- 3नए टॉर्क कन्वर्टर ट्रांसमिशन में स्लिप कम करने के लिए लॉक-अप क्लच शामिल होता है
Torque Converter आज के समय में automatic transmission की पहचान बन चुका है और इसकी वजह है कारों में इसका व्यापक इस्तेमाल। Torque Converter गियरबॉक्स का उपयोग कारों में 1940 के दशक से किया जा रहा है। हालांकि, समय के साथ यह तकनीक काफ़ी विकसित हुई है और आज यह automatic transmissions में सबसे बेहतर ड्राइविंग अनुभव देने वालों में गिनी जाती है।
Torque Converter सिर्फ़ mass-market कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि luxury और sports cars में भी इसका इस्तेमाल होता है। जैसे-जैसे हम कीमत की सीढ़ी ऊपर चढ़ते हैं, Torque Converter के पीछे की तकनीक और भी उन्नत होती जाती है, जिससे गियर बदलने का अनुभव ज़्यादा तेज़ और स्मूद हो जाता है। कुल मिलाकर, Torque Converter का मूल सिद्धांत और काम करने का तरीका लगभग सभी कारों में एक जैसा ही रहता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि Torque Converter गियरबॉक्स कैसे काम करता है, इसके फ़ायदे, नुकसान और इससे लैस बेहतरीन कारें कौन-सी हैं।
Torque Converter क्या होता है?
आमतौर पर ‘AT’ के नाम से पहचाने जाने वाला Torque Converter गियरबॉक्स, fluid dynamics के सिद्धांत पर काम करता है और इंजन से transmission तक पावर पहुँचाता है। इसमें एक Pump (Impeller) होता है, जो सीधे इंजन से जुड़ा रहता है और उसके साथ लगातार घूमता रहता है। यह Pump transmission fluid को Turbine की ओर भेजता है, जिससे Turbine घूमने लगती है। Turbine आगे transmission shaft से जुड़ी होती है, जो पहियों तक पावर पहुँचाती है।
Torque Converter की सबसे शुरुआती यूनिट्स भी इसी बुनियादी सिद्धांत पर काम करती थीं। लेकिन आधुनिक Torque Converters में कई अतिरिक्त और अहम हिस्से जोड़े गए हैं, जो इसे ज़्यादा परिष्कृत और बेहतर अनुभव देने वाला बनाते हैं।
Torque Converter कैसे काम करता है?
Torque Converter automatic transmission में Pump पर लगे ब्लेड transmission fluid को तेज़ी से Turbine की ओर भेजते हैं। इस fluid के दबाव से Turbine घूमती है और वही पावर आगे पहियों तक पहुँचती है। जब कार रुकी हुई होती है या बहुत कम रफ़्तार पर चल रही होती है, तब Pump और Turbine अलग-अलग गति से घूम सकते हैं। इसे slip कहा जाता है।यह slip बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि यही smoothness लाता है और कार रुकने पर इंजन को बंद होने से बचाता है।
आधुनिक Torque Converters में दक्षता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त हार्डवेयर भी दिया जाता है। Pump और Turbine के बीच एक Stator लगाया जाता है, जो transmission fluid के प्रवाह को बेहतर बनाता है। इससे torque multiplication होता है, यानी कम रफ़्तार पर बेहतर acceleration मिलता है।
तेज़ रफ़्तार पर यही slip उपयोगी नहीं रहता और efficiency कम कर सकता है। इस समस्या को हल करने के लिए lock-up clutch का इस्तेमाल किया जाता है, जो Pump और Turbine को आपस में लॉक कर देता है।
Torque Converter में ज़रूरी gear ratio हासिल करने के लिए planetary gear set का उपयोग होता है। यह गियरों की एक जटिल व्यवस्था होती है, जो अलग-अलग संयोजनों में काम करके कई gear ratios बना सकती है। Gear बदलने की पूरी प्रक्रिया Transmission Control Unit (TCU) के नियंत्रण में होती है।
TCU कई sensors से मिलने वाले डेटा के आधार पर gear बदलता है और Torque Converter के slip को नियंत्रित करता है। इनमें शामिल हैं:
- Throttle Position Sensor – throttle की स्थिति मापने के लिए
- Vehicle Speed Sensor – पहियों की गति से गाड़ी की रफ़्तार तय करने के लिए
- Engine Speed Sensor – जिसे आमतौर पर RPM कहा जाता है
- Input Shaft Sensor – इंजन की गति मापने और lock-up clutch को सक्रिय करने में मदद करता है
- Output Shaft Sensor – transmission की गति मापता है और slip तय करने में सहायक होता है
- Transmission Fluid Sensor – transmission fluid के तापमान और दबाव को मापने के लिए
TCU ज़रूरत पड़ने पर और भी sensors का उपयोग कर सकता है, ताकि गियर बदलने का फ़ैसला ज़्यादा सटीक हो सके।
torque converter

Torque Converter के फ़ायदे
Torque Converters का इस्तेमाल सालों से हर तरह की कारों में किया जा रहा है और इसकी वजह है इनका बहुमुखी स्वभाव:
- स्मूद ऑपरेशन
Pump और Turbine के बीच बनने वाला slip गियर बदलते समय पावर डिलीवरी में आने वाले अंतर को बेहद स्मूद बना देता है। अचानक तेज़ acceleration की माँग होने पर, transmission के जल्दी downshift करने में भी यह मददगार होता है।
- कम घिसावट
fluid coupling की वजह से mechanical wear and tear कम होता है। इसी कारण Torque Converters काफ़ी मज़बूत माने जाते हैं और ये दूसरे automatic transmissions की तुलना में ज़्यादा torque संभाल सकते हैं।
- Torque multiplication
Torque Converter की यह ख़ासियत कम रफ़्तार पर ड्राइविंग के लिए बेहद उपयोगी होती है।
इनकी smoothness और मजबूती इन्हें हर तरह की कारों के लिए उपयुक्त बनाती है।
Torque Converter के नुकसान
हालांकि Torque Converters काफ़ी उपयोगी होते हैं, लेकिन इनके कुछ नुकसान भी हैं:
- महँगे
आधुनिक Torque Converter, manual transmission की तुलना में काफ़ी महँगे होते हैं। इस लागत को कम करने का एक अच्छा तरीका सेकंड हैंड automatic cars पर विचार करना है।
- जटिल डिज़ाइन
आज के Torque Converters काफ़ी जटिल हो चुके हैं। आम तौर पर maintenance कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन अचानक ख़राबी आने पर मरम्मत का ख़र्च ज़्यादा हो सकता है।
- ज़्यादा वज़न
Torque Converters, manual transmissions की तुलना में भारी होते हैं।
भारत में Torque Converter वाली बेहतरीन कारें
भारत में कई कारें Torque Converter automatic transmission के साथ उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ बेहतरीन विकल्प नीचे दिए गए हैं:
| क्रॉसओवर | सेडान | SUVs |
| Maruti Suzuki Fronx | Volkswagen Virtus, Skoda Slavia | Skoda Kylaq, Kia Sonet, Maruti Suzuki Brezza, Maruti Suzuki Jimny, Skoda Kushaq, Volkswagen Taigun, Hyundai Creta, Kia Seltos, Mahindra Thar |
बजट में automatic कार चाहने वालों के लिए इस्तेमाल की हुई automatic cars भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती हैं।
निष्कर्ष
Torque Converter सबसे बहुमुखी automatic transmission माना जाता है, क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से स्मूद होता है और आधुनिक तकनीक ने इसकी fuel efficiency से जुड़ी कमियों को भी काफ़ी हद तक कम कर दिया है। lock-up clutch के इस्तेमाल से ऊँची रफ़्तार पर महसूस होने वाली power lag की समस्या भी लगभग ख़त्म हो गई है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि BMW की M series कारें अब पहले पसंद किए जाने वाले DCT की जगह Torque Converter transmission का इस्तेमाल कर रही हैं। BMW से याद आया अगर आप भारत में उपलब्ध BMW की सबसे सस्ती कारों के बारे में पढ़ना चाहते हैं तो अभी लिंक पर क्लिक करें।
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