

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) क्या होती है और कैसे अप्लाई करें?
- 1HSRP प्लेट चोरी, फर्जीवाड़े और गलत पहचान को रोकने में अहम भूमिका निभाती है
- 2चाहे कार हो या बाइक, HSRP नंबर प्लेट लगवाना अब सभी के लिए ज़रूरी है।
- 3HSRP में लेज़र कोड, होलोग्राम और RFID टैग से वाहन की पहचान सुरक्षित होती है
- HSRP नंबर प्लेट क्या होती है?
- हर HSRP नंबर प्लेट पर क्या-क्या होता है?
- अब गाड़ियों में सिर्फ़ दो नहीं, बल्कि तीन पहचान होती हैं
- HSRP नंबर प्लेट की मुख्य विशेषताएँ
- HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है?
- HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है और इसे ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें?
- HSRP के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
- HSRP नंबर प्लेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
- तरीका 1: IndiaHSRP पोर्टल से आवेदन कैसे करें?
- तरीका 2: Book-My-HSRP पोर्टल से आवेदन कैसे करें?
- HSRP से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जो आपको ज़रूर याद रखनी चाहिए
- HSRP नंबर प्लेट कैसे लगवाएं और इससे जुड़ी ज़रूरी जानकारी
- HSRP लगवाने में कितना समय लगता है?
- HSRP नंबर प्लेट की कीमत कितनी होती है?
- HSRP न होने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
- किन वाहनों को HSRP से छूट मिली है?
- HSRP से जुड़ी आम गलतफहमियाँ
- निष्कर्ष
HSRP यानी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एक खास तरह की नंबर प्लेट होती है, जिसे भारत सरकार ने सभी गाड़ियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। बिना HSRP के गाड़ी चलाना अब कानूनन गलत है और इस पर भारी जुर्माना लग सकता है।
इसी वजह से आज बहुत से वाहन मालिक यह जानना चाहते हैं कि HSRP आखिर होती क्या है, यह सामान्य नंबर प्लेट से कैसे अलग है और इसे बनवाने की प्रक्रिया क्या है। अगर आपकी गाड़ी पर अभी तक HSRP नहीं लगी है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद ज़रूरी है।
HSRP नंबर प्लेट क्या होती है?
HSRP यानी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एक मानकीकृत नंबर प्लेट है, जिसे भारत में सभी दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए लागू किया गया है। यह प्लेट सामान्य नंबर प्लेट की तरह नहीं होती, बल्कि इसे खास सुरक्षा नियमों के तहत बनाया और लगाया जाता है।
यह प्लेट आमतौर पर एल्युमिनियम से बनी होती है और इसे गाड़ी पर ऐसे स्नैप लॉक स्क्रूज़ से फिट किया जाता है जिन्हें बिना तोड़े निकाला नहीं जा सकता। यानी एक बार प्लेट लग गई, तो उसे आसानी से बदला नहीं जा सकता।
हर HSRP नंबर प्लेट पर क्या-क्या होता है?
हर HSRP प्लेट पर कुछ तय जानकारियाँ होती हैं, जो इसे सामान्य नंबर प्लेट से अलग बनाती हैं:
- गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर
- बाईं तरफ IND लिखा होता है (भारत का अंतरराष्ट्रीय कोड)
- ऊपर बाईं ओर अशोक चक्र का होलोग्राम, जो सुरक्षा चिन्ह होता
- नीचे दाईं ओर लेज़र से उकेरा गया यूनिक सीरियल नंबर
खास बात यह है कि आगे और पीछे लगी प्लेट का सीरियल नंबर अलग-अलग होता है।
अब गाड़ियों में सिर्फ़ दो नहीं, बल्कि तीन पहचान होती हैं
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि HSRP सिस्टम में अब गाड़ी की पहचान सिर्फ नंबर प्लेट तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं:
- आगे की HSRP नंबर प्लेट
- पीछे की HSRP नंबर प्लेट
- कलर कोडेड विंडशील्ड स्टिकर
यह स्टिकर गाड़ी की सामने वाली कांच पर चिपकाया जाता है और इसमें गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर, सीरियल नंबर और रजिस्ट्रेशन की तारीख दर्ज होती है। यह स्टिकर भी HSRP सिस्टम का ही हिस्सा है।
Expert Tip:
अगर आपकी प्लेट तो लगी है लेकिन विंडशील्ड स्टिकर नहीं है, तो भी आपकी HSRP प्रक्रिया अधूरी मानी जा सकती है।
HSRP नंबर प्लेट की मुख्य विशेषताएँ
1) रिफ्लेक्टिव मटेरियल – रात में भी साफ़ पहचान
HSRP प्लेट्स रिफ्लेक्टिव मटेरियल से बनी होती हैं, जिससे रात के समय गाड़ी का नंबर साफ़ दिखाई देता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है और ट्रैफिक कैमरे भी नंबर आसानी से पढ़ पाते हैं।
रंगों का मतलब भी तय है:
- निजी पेट्रोल या डीज़ल गाड़ियों के लिए – सफेद प्लेट
- इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए – हरी प्लेट
- टैक्सी और कमर्शियल गाड़ियों के लिए – पीली प्लेट
2) एक जैसा फॉन्ट – हर गाड़ी की एक जैसी पहचान

HSRP नंबर प्लेट में एक तय फॉन्ट इस्तेमाल किया जाता है। पहले लोग अलग-अलग स्टाइल, मोटे अक्षर या स्थानीय भाषा के अक्षर लगवा लेते थे, जिससे नंबर पढ़ना मुश्किल हो जाता था।
अब एक जैसा फॉन्ट होने से:
- ट्रैफिक कैमरे सही नंबर पढ़ पाते हैं
- फर्जी नंबर प्लेट पहचानना आसान हो गया है
- हर राज्य में नंबर प्लेट एक जैसी दिखती है
3) मजबूत सुरक्षा फीचर्स – चोरी और फर्जीवाड़ा मुश्किल
HSRP की सबसे बड़ी ताकत इसकी सुरक्षा है। पहले वाहन चोरी के बाद नंबर प्लेट बदलना आसान था, लेकिन अब:
- हर प्लेट पर यूनिक लेज़र नंबर होता है
- अशोक चक्र वाला होलोग्राम नकली बनाना मुश्किल है
- प्लेट को बिना तोड़े निकाला नहीं जा सकता
इसके अलावा अब HSRP में RFID टैग भी जोड़ा जा रहा है। इसमें गाड़ी की जरूरी जानकारी डिजिटल रूप में होती है, जिसे टोल प्लाज़ा और ट्रैफिक सिस्टम स्कैन कर सकते हैं।
Expert Insight:
RFID की वजह से आने वाले समय में चालान, टोल और ट्रैफिक नियमों का पालन और भी सख़्त और सटीक होगा।
HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है?
HSRP सिर्फ एक नई नंबर प्लेट नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि:
- यह गाड़ी की चोरी रोकने में मदद करती है
- ट्रैफिक नियमों का पालन आसान बनाती है
- कैमरों से पहचान तेज़ और सही होती है
- पूरे देश में एक जैसा सिस्टम लागू होता है
- कानून के अनुसार अब यह हर वाहन के लिए अनिवार्य है
अगर बिना HSRP के गाड़ी चलाई जाती है, तो ट्रैफिक पुलिस ₹10,000 तक का जुर्माना लगा सकती है।
HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है और इसे ऑनलाइन कैसे अप्लाई करें?
HSRP यानी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट अब हर वाहन के लिए अनिवार्य है। बिना HSRP के गाड़ी चलाना कानूनी अपराध माना जाता है और इस पर ₹10,000 तक का जुर्माना लग सकता है।
यही वजह है कि आज लगभग हर वाहन मालिक यह जानना चाहता है कि HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है, इससे क्या फायदे होते हैं और इसे घर बैठे ऑनलाइन कैसे अप्लाई किया जा सकता है। अगर आपकी गाड़ी पर अब तक HSRP नहीं लगी है, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत काम की है।
HSRP नंबर प्लेट क्यों ज़रूरी है?
HSRP सिर्फ एक नई नंबर प्लेट नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और वाहन पहचान व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाई गई है। इसके पीछे कुछ बहुत साफ़ और व्यावहारिक कारण हैं।
1) पूरे देश में एक जैसा सिस्टम
HSRP से पूरे भारत में गाड़ियों की नंबर प्लेट का एक जैसा फॉर्मेट लागू हो जाता है।
इससे:
- ट्रैफिक पुलिस को गाड़ी पहचानने में आसानी होती है
- कैमरे सही तरीके से नंबर पढ़ पाते हैं
- फर्जी या बदली हुई नंबर प्लेट पकड़ना आसान हो जाता है
2) सड़क सुरक्षा बेहतर होती है
HSRP प्लेट में इस्तेमाल किया गया रिफ्लेक्टिव मटेरियल रात के समय गाड़ी को साफ़ दिखाई देने में मदद करता है।
इसका सीधा फायदा यह होता है कि:
- रात में हादसों की संभावना कम होती है
- ट्रैफिक कैमरे नंबर आसानी से पकड़ लेते हैं
3) चोरी और गड़बड़ी पर रोक
HSRP प्लेट पर:
- यूनिक लेज़र सीरियल नंबर होता है
- अशोक चक्र का होलोग्राम लगा होता है
- प्लेट को बिना तोड़े हटाया नहीं जा सकता
इन वजहों से चोरी की गाड़ी पर नंबर प्लेट बदलना अब पहले जितना आसान नहीं रहा।
4) RFID टैग से निगरानी आसान
अब HSRP में RFID टैग भी जोड़ा जा रहा है। इसमें गाड़ी की ज़रूरी जानकारी डिजिटल रूप में होती है, जिसे:
- टोल प्लाज़ा
- ट्रैफिक सिस्टम
- ऑटोमैटिक चेकिंग सिस्टम
आसानी से स्कैन कर सकते हैं।
Expert Tip:
आने वाले समय में चालान और ट्रैफिक नियमों की निगरानी ज़्यादातर RFID और कैमरों से ही होगी, इसलिए HSRP लगवाना अब टालने वाली चीज़ नहीं है।
HSRP के लिए कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
अच्छी बात यह है कि HSRP के लिए ज़्यादा काग़ज़ी काम नहीं होता।
आपको केवल यह चाहिए:
- वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
RC में इंजन नंबर, चेसिस नंबर और वाहन की पूरी जानकारी होती है, जो आवेदन के समय डाली जाती है।
HSRP नंबर प्लेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
नई गाड़ी के लिए
अगर आपने हाल ही में नई गाड़ी खरीदी है, तो आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती।
डीलरशिप आपकी गाड़ी के लिए:
- HSRP का आवेदन करती है
- और डिलीवरी से पहले प्लेट लगाकर देती है
पुरानी गाड़ी के लिए
अगर आपकी गाड़ी पुरानी है या आपकी नंबर प्लेट खराब हो चुकी है, तो आप ऑनलाइन पोर्टल से खुद HSRP ऑर्डर कर सकते हैं।
तरीका 1: IndiaHSRP पोर्टल से आवेदन कैसे करें?

यह पोर्टल भारत के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए HSRP बुकिंग की सुविधा देता है।
स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:
- IndiaHSRP की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
- “HSRP ऑर्डर करें” विकल्प पर क्लिक करें
- अपनी सामान्य जानकारी भरें (नाम, मोबाइल नंबर, पता)
- अब गाड़ी की जानकारी डालें:
- रजिस्ट्रेशन नंबर
- इंजन नंबर
- चेसिस नंबर
- वाहन मॉडल
- ईंधन प्रकार
- अपनी RC की डिजिटल कॉपी अपलोड करें
- दिखाई गई जानकारी और कीमत को ध्यान से जाँचें
- ऑनलाइन भुगतान करें
- भुगतान के बाद ऑर्डर कन्फर्म हो जाएगा
आप वेबसाइट के होमपेज से अपने ऑर्डर की स्थिति भी देख सकते हैं।
Expert Tip:
फॉर्म भरते समय इंजन और चेसिस नंबर बिल्कुल वही डालें जो RC में लिखा हो, वरना ऑर्डर अटक सकता है।
तरीका 2: Book-My-HSRP पोर्टल से आवेदन कैसे करें?

यह पोर्टल फिलहाल कुछ चुने हुए राज्यों में HSRP की सुविधा देता है, जैसे:
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:
- Book-My-HSRP की वेबसाइट पर जाएँ
- “HSRP और कलर स्टिकर” वाला विकल्प चुनें
- अपना राज्य, वाहन नंबर और इंजन नंबर भरें
- फिटमेंट सेंटर और अपॉइंटमेंट की तारीख चुनें
- अपनी जानकारी की पुष्टि करें
- ऑनलाइन भुगतान करें
भुगतान के बाद आपको एक रसीद मिलेगी, जिससे आप:
- अपॉइंटमेंट पर प्लेट लगवा सकते हैं
- या ऑर्डर की स्थिति देख सकते हैं
HSRP से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जो आपको ज़रूर याद रखनी चाहिए
HSRP नंबर प्लेट अब सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि हर वाहन मालिक की ज़िम्मेदारी बन चुकी है। इसे लेकर कुछ बातें हैं, जिन्हें अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं और बाद में परेशानी में पड़ते हैं।
- नई गाड़ियों की कीमत में HSRP का शुल्क पहले से शामिल होता है, डीलरशिप इसे अलग से नहीं ले सकती।
- पुरानी गाड़ियों के लिए हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत पोर्टल या आरटीओ वेबसाइट से ही HSRP ऑर्डर करें।
- HSRP के साथ RFID टैग और कलर-कोडेड विंडशील्ड स्टिकर भी मिलता है, जो गाड़ी की असली पहचान साबित करता है।
Expert Tip:
अगर कोई व्यक्ति सस्ती HSRP लगाने का दावा करे, तो सावधान रहें। असली HSRP केवल अधिकृत स्रोत से ही मिलती है।
HSRP नंबर प्लेट कैसे लगवाएं और इससे जुड़ी ज़रूरी जानकारी
HSRP ऑर्डर करना जितना आसान है, उसे सही तरीके से लगवाना उतना ही ज़रूरी है। गलत फिटमेंट या देरी करने पर आपकी गाड़ी नियमों के दायरे में नहीं मानी जाती।
इसीलिए यह जानना ज़रूरी है कि HSRP प्लेट गाड़ी पर कैसे लगती है, इसमें कितना समय लगता है, कितना खर्च आता है और अगर आपने HSRP नहीं लगवाई तो क्या जुर्माना लग सकता है।
HSRP नंबर प्लेट कैसे लगती है?
सुरक्षा कारणों से HSRP प्लेट को सामान्य स्क्रू से नहीं, बल्कि रिवेट्स से लगाया जाता है। रिवेट्स एक बार लगने के बाद दोबारा नहीं निकलते। अगर निकाले जाएँ, तो नई रिवेट्स लगानी पड़ती हैं।
इसका मतलब साफ है — HSRP केवल अधिकृत फिटमेंट सेंटर या डीलरशिप से ही लगवानी चाहिए।
- नई गाड़ियों में डीलर खुद HSRP इंस्टॉल करता है।
- पुरानी गाड़ियों में, ऑनलाइन ऑर्डर के बाद तय फिटमेंट सेंटर पर जाकर प्लेट लगवानी होती है।
ज़रूरी सलाह:
घर पर HSRP लगाने की कोशिश न करें। इससे प्लेट खराब हो सकती है और गाड़ी को नुकसान भी पहुँच सकता है।
HSRP लगवाने में कितना समय लगता है?
ऑर्डर से लेकर फिटमेंट तक की प्रक्रिया आमतौर पर इस तरह होती है:
- 3 से 5 दिन – नंबर प्लेट तैयार होने में
- 5 से 7 दिन – प्लेट फिटमेंट सेंटर तक पहुँचने में
- 5 से 10 मिनट – गाड़ी पर प्लेट लगाने में
कुल मिलाकर, 10 से 15 दिन में पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
Expert Insight:
त्योहारों या साल के आख़िरी महीनों में ऑर्डर ज़्यादा होने से थोड़ा समय बढ़ सकता है।
HSRP नंबर प्लेट की कीमत कितनी होती है?

नई गाड़ियों में HSRP की कीमत पहले से गाड़ी के दाम में शामिल होती है। लेकिन पुरानी गाड़ियों के लिए यह शुल्क अलग से देना पड़ता है।
| वाहन का प्रकार | अनुमानित शुल्क |
| दोपहिया वाहन | ₹300 – ₹400 |
| तीनपहिया वाहन | ₹400 – ₹600 |
| चारपहिया वाहन | ₹1,000 – ₹1,100 (आमतौर पर) |
कुछ पोर्टल:
- डिलीवरी चार्ज (₹100–₹200) ले सकते हैं
- VIP या फैंसी नंबर खरीदने के लिए अतिरिक्त शुल्क होता है
HSRP न होने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
हालाँकि HSRP पूरे भारत में अनिवार्य है, लेकिन जुर्माने की राशि राज्य के अनुसार बदलती है।
| राज्य | अनुमानित जुर्माना |
| कर्नाटक | ₹500 – ₹1,000 |
| उत्तर प्रदेश | ₹5,000 – ₹10,000 |
| दिल्ली / महाराष्ट्र | ₹2,000 – ₹5,000 |
जैसे-जैसे पुराने वाहनों पर नियम सख़्त हो रहे हैं, बिना HSRP गाड़ी चलाने पर चालान कटना लगभग तय है।
किन वाहनों को HSRP से छूट मिली है?
लगभग सभी गाड़ियों पर HSRP अनिवार्य है, लेकिन कुछ विशेष मामलों में छूट दी जाती है:
- विंटेज और क्लासिक कारें
- कृषि उपयोग की मशीनें (जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर – यह आरटीओ के निर्णय पर निर्भर करता है)
इनके अलावा:
कार, बाइक, बस, ट्रक, टैक्सी — सभी पर HSRP ज़रूरी है।
HSRP से जुड़ी आम गलतफहमियाँ
सिर्फ ‘IND’ लिखा होना HSRP नहीं है
बाज़ार में कई प्लेट्स HSRP जैसी दिखती हैं, लेकिन असली प्लेट में:
- लेज़र कोड
- RFID टैग
- अशोक चक्र का होलोग्राम अनिवार्य होता है।
HSRP से आपकी लोकेशन ट्रैक नहीं होती
HSRP में GPS नहीं, बल्कि RFID टैग होता है, जो सिर्फ टोल और ट्रैफिक सिस्टम पर स्कैन होता है।
नई गाड़ी के लिए अलग से पैसा देना पड़ता है
नई गाड़ियों में HSRP की कीमत पहले से शामिल होती है। डीलर अलग से पैसे नहीं मांग सकता।
निष्कर्ष
HSRP नंबर प्लेट सिर्फ कानून का पालन नहीं, बल्कि आपकी गाड़ी की सुरक्षा और पहचान का ज़रिया है। यह चोरी रोकने में मदद करती है, सड़क सुरक्षा बढ़ाती है और ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाती है। पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए यह एक बार की प्रक्रिया है और इसे पूरा करना आज पहले से कहीं आसान है। VIP या फैंसी नंबर आपकी पसंद हो सकती है, लेकिन HSRP लगवाना अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सभी को बड़ा करें

























