

सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले जान लें ये छुपे हुए खर्च – वरना महंगा पड़ सकता है
- 1पुरानी कार की असली लागत खरीद कीमत से 15–30% ज़्यादा हो सकती है
- 2इंश्योरेंस, आरसी, चालान और मरम्मत खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं
- 3खरीद से पहले जांच, सर्विस हिस्ट्री और 20% अतिरिक्त बजट रखें
- 1. इंश्योरेंस ट्रांसफर और रिन्यूअल
- 2. आरसी ट्रांसफर और हाइपोथिकेशन हटाने का खर्च
- 3. लंबित ट्रैफिक चालान
- 4. तुरंत होने वाले मैकेनिकल खर्च
- 5. टायर बदलने का खर्च
- 6. दावा किया गया माइलेज बनाम वास्तविक माइलेज
- 7. एक्सटेंडेड वारंटी और मेंटेनेंस पैकेज
- पहले साल की कुल वास्तविक लागत (उदाहरण)
- समझदार खरीदार की रणनीति
- अंतिम सुझाव
अगर आप प्री-ओन्ड या सेकेंड हैंड कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ गाड़ी की कीमत देखकर फैसला लेना एक बड़ी गलती हो सकती है। जो कीमत आपको दिखती है, वह असली खर्च नहीं होती — असली खर्च खरीद के बाद सामने आते हैं। कई मामलों में पुरानी कार की पहले साल की कुल लागत गाड़ी की खरीद कीमत से 15%–30% तक ज्यादा हो सकती है।
ज़रा सोचिए — आपने ₹4.5 लाख में कार खरीदी। आपको लगा शानदार सौदा मिल गया। लेकिन कुछ महीनों में:
- ₹18,000 इंश्योरेंस में
- ₹30,000 रिपेयर में
- ₹4,000 आरसी ट्रांसफर में
- ₹15,000 अतिरिक्त फ्यूल खर्च में
अब वही कार ₹5.4 लाख की पड़ गई। यहीं समझदारी काम आती है।
इस लेख में हम जानेंगे — प्री-ओन्ड कार की असली लागत आखिर कितनी होती है?
1. इंश्योरेंस ट्रांसफर और रिन्यूअल
इंश्योरेंस सबसे पहला खर्च है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
संभावित खर्च:
- कम्प्रीहेंसिव इंश्योरेंस: ₹12,000 – ₹25,000
- जीरो डेप ऐड-ऑन: 10–15% अतिरिक्त प्रीमियम
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस: ₹6,000 – ₹12,000
ध्यान रखने वाली बातें:
- इंश्योरेंस 14 दिनों के अंदर आपके नाम ट्रांसफर होना चाहिए
- एक्सपायर पॉलिसी होने पर तुरंत नया इंश्योरेंस लेना जरूरी है
- जीरो डेप महंगा है लेकिन ज्यादा सुरक्षा देता है
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगला खर्च आरटीओ से जुड़ा है।
2. आरसी ट्रांसफर और हाइपोथिकेशन हटाने का खर्च
आरसी आपके नाम ट्रांसफर करवाना कानूनी रूप से जरूरी है।
संभावित शुल्क:
- आरसी ट्रांसफर फीस: ₹300 – ₹1500
- एजेंट शुल्क: ₹2000 – ₹5000
- हाइपोथिकेशन हटाने का शुल्क: ₹1500 – ₹3000
अगर कार पर पहले लोन था, तो बैंक से एनओसी लेना जरूरी होगा। और अगर ट्रांसफर के दौरान पुराने चालान निकल आए तो?
3. लंबित ट्रैफिक चालान
पुराने चालान आपकी जिम्मेदारी बन सकते हैं।
आम जुर्माने:
- तेज स्पीड से गाड़ी चलाना: ₹1000 – ₹2000
- सीट बेल्ट न लगाना: ₹1000
- रेड लाइट पार करना: ₹5000 तक
- प्रदूषण नियम उल्लंघन: ₹10,000 तक
खरीदने से पहले क्या करें:
- परिवहन पोर्टल पर वाहन नंबर डालकर चालान जांचें
- राज्य परिवहन वेबसाइट पर स्टेटस देखें
- विक्रेता से लिखित पुष्टि लें
लेकिन मान लीजिए कागज साफ हैं…फिर भी असली खर्च मैकेनिकल मरम्मत में आता है।
4. तुरंत होने वाले मैकेनिकल खर्च

टेस्ट ड्राइव में कार ठीक लग सकती है, लेकिन कुछ महीनों बाद खर्च सामने आ सकते हैं।
आम मरम्मत खर्च:
- क्लच प्लेट बदलना: ₹8,000 – ₹15,000
- बैटरी बदलना: ₹4,000 – ₹8,000
- ब्रेक पैड बदलना: ₹3,000 – ₹6,000
- सस्पेंशन का काम: ₹10,000 – ₹25,000
- एसी कम्प्रेसर बदलना: ₹12,000 – ₹20,000
- छोटे काम (बेल्ट, फिल्टर आदि): ₹2,000 – ₹6,000
क्यों जरूरी है जांच करवाना?
- इंजन में लीकेज पकड़ में आता है
- सस्पेंशन की हालत पता चलती है
- पुराने एक्सीडेंट का पता चल सकता है
- भविष्य के खर्च का अनुमान लगता है
लेकिन अगर टायर भी खराब हों तो खर्च और बढ़ सकता है। इसलिए इन सब खर्चों से बचने के लिए प्री डिलिवरी इन्सपेक्शन करवा लेना ठीक रहता है।
5. टायर बदलने का खर्च

टायर महंगे होते हैं और अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
चार टायर की अनुमानित कीमत:
- हैचबैक: ₹18,000 – ₹25,000
- सेडान: ₹25,000 – ₹35,000
- एसयूवी: ₹35,000 – ₹50,000
कब बदलना जरूरी?
- टायर की ग्रूव कम हो
- साइड में दरारें हों
- 4–5 साल पुराने हों
लेकिन हर महीने चलने वाला खर्च भी मायने रखता है — माइलेज।
6. दावा किया गया माइलेज बनाम वास्तविक माइलेज

पुरानी कार का माइलेज अक्सर 10–20% कम हो सकता है।
उदाहरण:
- रोज़ चलना: 40 किलोमीटर
- फ्यूल कीमत: ₹100 प्रति लीटर
- दावा किया गया माइलेज: 15 किलोमीटर प्रति लीटर
- वास्तविक माइलेज: 12–13 किलोमीटर प्रति लीटर
अनुमानित मासिक खर्च:
- 15 km/l पर: लगभग ₹8,000
- 12 km/l पर: लगभग ₹9,600
अंतर: ₹1,500–₹2,000 प्रति माह, सालाना यह ₹18,000–₹24,000 तक जा सकता है।
7. एक्सटेंडेड वारंटी और मेंटेनेंस पैकेज

अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है, लेकिन खर्च भी बढ़ता है।
संभावित खर्च:
- एक्सटेंडेड वारंटी: ₹10,000 – ₹25,000
- वार्षिक मेंटेनेंस पैकेज: ₹6,000 – ₹15,000 प्रति वर्ष
पहले साल की कुल वास्तविक लागत (उदाहरण)
- कार की कीमत: ₹4,50,000
- इंश्योरेंस: ₹18,000
- आरसी ट्रांसफर: ₹4,000
- मरम्मत खर्च: ₹30,000
- टायर बदलना: ₹25,000
- अतिरिक्त फ्यूल खर्च: ₹15,000
कुल पहले साल का खर्च: ₹5,42,000
यानी ₹4.5 लाख की कार वास्तव में ₹5.4 लाख तक जा सकती है।
आम गलतियाँ
- सिर्फ कम कीमत देखकर खरीद लेना
- सर्विस हिस्ट्री न मांगना
- चालान जांच न करना
- मैकेनिक से जांच न करवाना
- अतिरिक्त 15–20% बजट न रखना
समझदार खरीदार की रणनीति
- हमेशा 15–20% अतिरिक्त बजट रखें
- स्वतंत्र मैकेनिक से जांच करवाएं
- टायर और बैटरी की हालत पहले देखें
- इंश्योरेंस और आरसी तुरंत ट्रांसफर करवाएं
- कीमत तय करते समय मरम्मत खर्च घटाएं
अंतिम सुझाव
प्री-ओन्ड कार खरीदना गलत फैसला नहीं है। सही जानकारी और सही बजट योजना के साथ यह एक समझदारी भरा निर्णय हो सकता है। लेकिन अगर आप सिर्फ “कम कीमत” देखकर फैसला लेते हैं, तो वही कार आगे चलकर महंगी साबित हो सकती है।
सही जांच कीजिए।
सही सवाल पूछिए।
और अपने आप से इतनी जांच पड़ताल नहीं कर सकते तो Cars24 से इस्तेमाल की हुई कार लेने पर आपको 300 से मापदंडों पर जांची-परखी कार मिलती है जिससे आप निश्चिंत होकर एक सेकंड हैंड कार ले सकते हैं। तभी आपकी प्री-ओन्ड कार सच में फायदे का सौदा बनेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सभी को बड़ा करें

























