

ड्रिफ्टिंग के शौकीनों के लिए बेस्ट कारें: खरीदें, मॉडिफाई करें और रेस ट्रैक पर दौड़ायें
- 1ड्रिफ्टिंग के शौकीनों के लिए RWD मैनुअल कार सबसे बेहतर साबित होती है
- 2₹3–4 लाख खर्च करके पुरानी RWD कार को ड्रिफ्टिंग के लिए मॉडिफाई किया जा सकता है
- 3ड्रिफ्टिंग सड़क पर करना गैरकानूनी है, इसे सिर्फ रेसिंग ट्रैक्स तक ही सीमित रखें
- ड्रिफ्टिंग के लिए सबसे उपयुक्त कारें
- ड्रिफ्टिंग के लिए सबसे अच्छी पुरानी (Used) रियर-व्हील-ड्राइव कारें
- ड्रिफ्टिंग के लिए नई Rear-Wheel Drive कारें
- ड्रीफ्ट कार में सबसे ज़रूरी शुरुआती मॉडिफिकेशन
- ड्रीफ्ट कार्स के छिपे हुए मेंटेनेंस और रनिंग खर्च
- भारत में ड्रीफ्टिंग के लिए बेहतरीन स्थान
- ड्रीफ्टिंग करते समय सुरक्षा क्यों है सबसे ज़रूरी?
- निष्कर्ष
ड्रिफ्टिंग की शुरुआत 1960 के दशक में जापान के स्ट्रीट रेसर्स के बीच हुई थी और 90 के दशक में यह एक रेसिंग स्पोर्ट के रूप में स्थापित हो गया। हालांकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता तब मिली जब 2006 में हॉलीवुड फिल्म The Fast and the Furious: Tokyo Drift रिलीज़ हुई।
भारत में भी यह फिल्म सुपरहिट रही, लेकिन यहां की ऑटोमोबाइल संस्कृति में ड्रिफ्टिंग अभी भी नई है। समय के साथ भारत में ड्रिफ्टिंग की लोकप्रियता बढ़ रही है — शोकेस इवेंट्स और प्रतियोगिताओं की संख्या में भी इज़ाफा हुआ है। अगर आप खुद की ड्रिफ्ट कार बनाना चाहते हैं और इसे सीखना चाहते हैं, तो आपके पास दो विकल्प हैं — या तो एक महंगी कार खरीदें और शुरुआत करें, या फिर सीमित बजट में कुछ लाख रुपये खर्च कर के खुद की ड्रिफ्ट कार तैयार करें।
इस गाइड में हम आपको बताएंगे कि ड्रिफ्टिंग के लिए किस प्रकार की कार खरीदनी चाहिए और किन बदलावों (modifications) की ज़रूरत पड़ेगी — ताकि आपकी शुरुआत सुरक्षित और बजट फ्रेंडली दोनों हो सके।
ड्रिफ्टिंग के लिए सबसे उपयुक्त कारें

ड्रिफ्टिंग के लिए सबसे उपयुक्त कार एक रियर-व्हील-ड्राइव (RWD) सेडान होती है, जिसमें मैनुअल ट्रांसमिशन होना चाहिए। भारत में ज़्यादातर आम कारें फ्रंट-व्हील-ड्राइव (FWD) होती हैं, लेकिन कुछ विकल्प मौजूद हैं। आमतौर पर भारत में RWD सेडान की तलाश में Mercedes-Benz C-Class और BMW 3 Series सबसे अच्छे विकल्प माने जाते हैं। हालांकि, इनके नए वर्ज़न केवल ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में ही उपलब्ध हैं, जिससे ड्रिफ्टिंग थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो जाती है — लेकिन असंभव नहीं।
ड्रिफ्टिंग के लिए सबसे अच्छी पुरानी (Used) रियर-व्हील-ड्राइव कारें
भारत में 15 साल से अधिक पुरानी Mercedes-Benz और BMW मॉडल्स को ऑनलाइन यूज़्ड कार मार्केटप्लेस पर सर्च करें। ऐसे मॉडल्स आमतौर पर ₹2-2.5 लाख के आस-पास की कीमत में मिल जाते हैं, अगर उनकी हालत एवरेज हो। कोशिश करें कि कार मैनुअल ट्रांसमिशन वाली हो, जिससे आपको बाद में कन्वर्जन कराने का खर्चा न उठाना पड़े।
2001 से 2010 तक की Mercedes-Benz C-Class (W203 और W204 जनरेशन) और BMW की 3 Series (E30, E36, E46 जनरेशन) ड्रिफ्टिंग के लिए बेहतरीन बेस मानी जाती हैं। अगर बजट की अनुमति हो, तो जापानी कारें जैसे Nissan 370Z या Lexus GS भी बेहतरीन विकल्प हैं — हालांकि ये भारत में दुर्लभ हैं।
मॉडल | अनुमानित यूज़्ड कार कीमत |
Mercedes-Benz C-Class W203 (2001-2007) | ₹2.5 लाख लगभग |
Mercedes-Benz C-Class W204 (2008-2014) | ₹2.5 लाख लगभग |
BMW 3 Series (E30, E36, E46) | ₹2.5–5 लाख |
BMW 3 Series (E90, F30) | ₹6–13 लाख |
Nissan 370Z | ₹17 लाख |
Lexus GS | ₹13 लाख |
BMW 1 Series | ₹25 लाख |
BMW M2 F87 | ₹60 लाख |
Porsche 718 Cayman | ₹70 लाख |
अगर आप एकदम बेहतरीन कंडीशन वाली कार खरीदेंगे, तो वह ज़रूर महंगी पड़ेगी। ड्रिफ्टिंग के दौरान खासकर शुरुआती फेज़ में कार के बॉडी पार्ट्स को नुकसान होना तय है। इसलिए हाई-माइलेज कारें देखें — जैसे 1 लाख किमी से ज़्यादा चली हों, ताकि कीमत भी कम हो और नुकसान का अफ़सोस भी न हो। पर ध्यान रखें कि कार का स्ट्रक्चरल डैमेज न हो।
ड्रिफ्टिंग के लिए नई Rear-Wheel Drive कारें
अगर आपका बजट इसकी इजाज़त देता है, तो आधुनिक BMW मॉडल्स ड्रिफ्टिंग के लिए बेहद उपयुक्त हैं और इनमें किसी भी तरह के बड़े मॉडिफिकेशन की ज़रूरत नहीं होती। BMW M340i एक शानदार विकल्प है — इसकी परफॉर्मेंस इतनी है कि आपको लंबे स्लाइड्स और पावर डिलीवरी में आसानी होती है।
लेकिन BMW M2 एक ऐसा विकल्प है जो मैनुअल ट्रांसमिशन में भी उपलब्ध है — और यह ड्रिफ्टिंग के लिए और भी अधिक नियंत्रण प्रदान करता है। वहीं, BMW M4 और M5 अपनी बेहतरीन ड्राइविंग डायनामिक्स के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं।
मॉडल | एक्स-शोरूम कीमत |
BMW M340i | ₹75 लाख |
BMW M2 G87 | ₹1.03 करोड़ |
BMW M4 | ₹1.5–1.9 करोड़ |
BMW M5 | ₹2 करोड़ |
ड्रीफ्ट कार में सबसे ज़रूरी शुरुआती मॉडिफिकेशन

अगर आप एक बजट फ्रेंडली ड्रीफ्ट कार बनाना चाहते हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप एक पुरानी रियर-व्हील-ड्राइव सेडान खरीदें — जैसे कि Mercedes-Benz C-Class W203 या कोई पुराना BMW 3 Series मॉडल। हालांकि कुछ रियर-व्हील-ड्राइव कारें बिना किसी मॉडिफिकेशन के भी ड्रीफ्ट कर सकती हैं, लेकिन कुछ खास अपग्रेड न केवल इस प्रक्रिया को आसान बनाएंगे बल्कि इसे सुरक्षित भी बनाएंगे।
डिफरेंशियल वेल्ड कराना
यह सबसे जरूरी और प्राथमिक बदलाव है जो ड्रीफ्टिंग में मदद करता है। इससे डिफरेंशियल हमेशा लॉक रहता है और दोनों रियर व्हील्स एक ही स्पीड पर घूमते हैं, जिससे ड्रीफ्ट करना संभव होता है। आमतौर पर किसी वर्कशॉप में डिफ वेल्ड कराने का खर्च ₹10,000 से ₹15,000 के बीच होता है।
वजन कम करना (Weight Reduction)
कार से गैर-ज़रूरी चीज़ें जैसे रियर सीट, कारपेट्स, ट्रिम आदि निकाल दें जो न तो जरूरी हैं और न ही सेफ। इससे आपकी कार हल्की होगी और ड्रीफ्ट करते समय ज़्यादा चुस्त और तेज़ प्रतिक्रिया देगी। यह एक ऐसा मॉड है जो आपको केवल थोड़े से टूल्स और समय में मुफ्त में मिल सकता है।
बकेट सीट्स और रेसिंग हार्नेस
रेसिंग बकेट सीट और हार्नेस ड्राइवर को सही पोजिशन में टिकाए रखते हैं और ड्रीफ्ट करते समय शरीर को इधर-उधर हिलने नहीं देते। इससे ड्राइवर को बेहतर नियंत्रण मिलता है और हार्नेस सुरक्षा बढ़ाता है। इनकी कीमत क्रमशः ₹15,000 और ₹20,000 के आसपास होती है।
कॉइलओवर सस्पेंशन
कॉइलओवर अपग्रेड करने से कार की बॉडी रोल कम होती है और सस्पेंशन टाइट हो जाता है, जिससे कंट्रोल में सुधार आता है और लंबी स्लाइडिंग में मदद मिलती है। कार खरीदने के बाद यह सबसे महंगा अपग्रेड होता है, जिसकी कीमत ₹75,000 से ₹1.3 लाख तक हो सकती है।
इन सभी मॉडिफिकेशन को कराने के लिए स्थानीय वर्कशॉप्स की तलाश करें जो खासतौर पर ड्रीफ्ट कार्स में विशेषज्ञता रखते हों, ताकि आपकी कार भरोसेमंद और सुरक्षित रहे।
ड्रीफ्ट कार्स के छिपे हुए मेंटेनेंस और रनिंग खर्च
हालांकि ड्रीफ्टिंग के लिए कुछ बेसिक मॉडिफिकेशन ही काफी हैं, लेकिन ड्रीफ्टिंग से कार के कुछ हिस्सों पर अधिक असर पड़ता है, जिससे छुपे हुए खर्च भी आते हैं।
बार-बार टायर बदलवाना
ड्रीफ्टिंग के दौरान टायर का अत्यधिक घिसाव होता है। शुरुआती दिनों में सस्ते या इस्तेमाल किए हुए टायर का उपयोग करें क्योंकि ये सस्ते होते हैं और कम ग्रिप होने से ड्रीफ्ट करना आसान बनाते हैं।
ब्रेक पैड और रोटर पर असर
शुरुआत में ब्रेक अपग्रेड जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आप हाइड्रॉलिक हैंडब्रेक इंस्टॉल करते हैं या ड्रीफ्टिंग का स्तर बढ़ाते हैं, तो ब्रेक पैड और रोटर को अपग्रेड करना ज़रूरी हो जाएगा।
कूलिंग सिस्टम अपग्रेड
ड्रीफ्टिंग के दौरान इंजन अत्यधिक गर्म होता है। इसलिए बेहतर रेडिएटर और ऑइल कूलर जैसे अपग्रेड्स इंजन की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो सकते हैं।
भारत में ड्रीफ्टिंग के लिए बेहतरीन स्थान
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ड्रीफ्टिंग एक विशेष प्रकार की ड्राइविंग है जिसे सिर्फ कंट्रोल्ड वातावरण में किया जाना चाहिए। सार्वजनिक सड़कों पर ड्रीफ्टिंग करना खतरनाक और अवैध है।
डेडिकेटेड रेस ट्रैक्स (महंगे विकल्प)
- बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (नोएडा)
- मद्रास मोटर रेस ट्रैक (चेन्नई)
- कारी मोटर स्पीडवे (कोयंबटूर)
- कोASTT ट्रैक
इन जगहों को पहले से बुक किया जा सकता है लेकिन ये अपेक्षाकृत महंगे होते हैं।
लोकल गो-कार्ट ट्रैक्स (बजट विकल्प)
छोटे शहरों में कई गो-कार्ट ट्रैक्स सस्ते में किराए पर मिल जाते हैं और ये शुरुआती ड्रीफ्ट प्रैक्टिस के लिए अच्छे विकल्प होते हैं।
स्थानीय ड्रीफ्ट ट्रैक्स
कुछ शहरों में विशेष रूप से ड्रीफ्टिंग के लिए बनाए गए ट्रैक्स होते हैं। ये सबसे सुरक्षित और किफायती विकल्प होते हैं।
ड्रीफ्टिंग करते समय सुरक्षा क्यों है सबसे ज़रूरी?

मोटरस्पोर्ट जितना रोमांचक होता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। लेकिन अगर आप सही सुरक्षा उपायों को अपनाते हैं, तो आप न केवल सुरक्षित ड्रिफ्ट कर सकते हैं बल्कि इसका भरपूर आनंद भी उठा सकते हैं। यहां कुछ ज़रूरी बातें हैं जो हर ड्रिफ्टिंग एंथूज़ियास्ट को ध्यान में रखनी चाहिए।
हेलमेट और ड्राइविंग ग्लव्स — किसी भी क्रैश की स्थिति में हेलमेट आपके सिर को गंभीर चोट से बचा सकता है। वहीं, ड्राइविंग ग्लव्स आपके हाथों को स्टेयरिंग व्हील पर बेहतर पकड़ के साथ-साथ स्क्रैच और ब्लिस्टर से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
डैमेज आम बात है — जब आप ड्रिफ्टिंग की प्रैक्टिस कर रहे हों या सीख रहे हों, तो यह तय मानिए कि कार को डैमेज होगा। स्क्रैच, बम्पर टूटना या बॉडी पैनल उखड़ना — ये सब इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इसलिए कार के हर छोटे-मोटे नुकसान पर भावुक न हों।
फेस मास्क और फिल्टर्स — ड्रिफ्टिंग के दौरान टायर्स बेहद तेज़ी से घिसते हैं जिससे हवा में धूल और केमिकल युक्त फ्यूम्स फैलते हैं। ऐसे में नाक और फेफड़ों की सुरक्षा के लिए फिल्टर वाले फेस मास्क का इस्तेमाल ज़रूरी है।
निष्कर्ष
भारत में ड्रीफ्टिंग की दुनिया धीरे-धीरे आकार ले रही है। कई इवेंट्स और मोटरस्पोर्ट कल्चर से जुड़े आयोजनों में अब ड्रीफ्टिंग को प्रमुखता दी जा रही है। जहां ज़्यादातर मोटरस्पोर्ट प्रतियोगिताएं ड्राइवर की गति या समय पर केंद्रित होती हैं, वहीं ड्रीफ्टिंग एक प्रकार की "ऑटोमोटिव आर्ट फॉर्म" है जिसमें कंट्रोल और स्टाइल का मेल देखने को मिलता है — खासकर तब जब दो कारें एक साथ सिंक्रनाइज़ तरीके से ड्रीफ्ट करती हैं।
भारत में एक ड्रीफ्ट कार बनाने का खर्च लगभग ₹3-4 लाख होता है, जिससे शुरुआत करना और प्रैक्टिस करना काफी सुलभ हो जाता है। हालांकि, इस खेल को जारी रखना और कार को मेंटेन करना समय के साथ महंगा हो सकता है। इस बात को हमेशा याद रखें — कभी भी पब्लिक रोड्स पर ड्रिफ्टिंग न करें और हर बार पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
ड्रिफ्टिंग की तो बात हो गई, पर ऐसा तो नहीं है कि आप जैसे ऐडवेंचर-पसंद व्यक्तित्व को लॉन्ग ड्राइव पर जाना पसंद ना हो। हर किसी को एक शांत और सुकूनभरी ड्राइव पसंद तो आती ही है। और उन यादगार लॉन्ग- ड्राइव्स के लिए एक खूबसूरत और शांत कार का होना भी जरूरी है। तो चलिए साथ मिलकर पढ़ते हैं लॉन्ग ड्राइव के लिए टॉप 13 कारें ।