

Used Car खरीदते समय 1st Owner या 2nd Owner! कौनसी चुनें?
- 11st ओनर कारें ज़्यादातर पूरी सर्विस रिकॉर्ड के साथ आती हैं और बेहतर रीसेल देती हैं
- 22nd ओनर कारें सस्ती होती हैं और फीचर्स भी अच्छे देती हैं, मगर जांच-पड़ताल जरूरी है
- 31st या 2nd ओनर कार चुनते समय बजट और भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखना चाहिए
1st owner बनाम 2nd owner used car को लेकर बहस कभी खत्म नहीं होती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि औसतन एक पहला मालिक अपनी कार लगभग 7 साल तक रखता है, दूसरा मालिक आमतौर पर सिर्फ़ 3 साल तक, और तीसरे मालिक के पास यह अवधि घटकर लगभग 2 साल रह जाती है। ऐसे में अगर आप 2025 में कोई प्री-ओन्ड कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा? दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं, और सही फैसला आपकी प्राथमिकताओं, बजट और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है।
इस ब्लॉग में हम 1st owner और 2nd owner used car के बीच मुख्य अंतर, फायदे और खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे। अंत तक आपको साफ़ समझ आ जाएगा कि आपकी ज़रूरतों के हिसाब से कौन-सा विकल्प बेहतर बैठता है।

1st Owner Used Car क्या होती है?
1st owner car वह होती है, जिसका मालिकाना हक़ शोरूम से निकलने के बाद सिर्फ़ एक ही व्यक्ति के पास रहा हो। ऐसी कारों में आमतौर पर ये बातें देखने को मिलती हैं:
- पूरी सर्विस और मेंटेनेंस हिस्ट्री उपलब्ध होती है
- अक्सर बेहतर हालत में होती हैं, क्योंकि पहले मालिक ने आम तौर पर ज़्यादा ध्यान रखा होता है
- कई मालिकों वाली कारों की तुलना में रीसेल वैल्यू ज़्यादा होती है
1st owner car के साथ भरोसे का स्तर ज़्यादा होता है, ख़ासकर सेडान, SUV या प्रीमियम मॉडल्स के मामले में, जहाँ कार का इतिहास और भरोसेमंद होना बेहद अहम होता है।
2nd Owner Used Car क्या होती है?
2nd owner car वह होती है, जिसके पहले दो मालिक रह चुके हों। यानी पहले व्यक्ति ने नई कार खरीदी और फिर किसी दूसरे व्यक्ति ने उससे वह कार ली। ऐसी कारें आमतौर पर शुरुआती क़ीमत में सस्ती होती हैं और सीमित बजट वाले ख़रीदारों के लिए उपयुक्त रहती हैं। लेकिन इनमें कुछ बातें ध्यान देने लायक होती हैं:
- पहले मालिक ने कार को कैसे रखा, इस पर निर्भर करते हुए ज़्यादा घिसावट के संकेत मिल सकते हैं
- कई बार सर्विस रिकॉर्ड अधूरे हो सकते हैं, इसलिए गाड़ी की अच्छी तरह जांच ज़रूरी होती है
- खरीदने से पहले किसी छिपी हुई समस्या की संभावना को ध्यान में रखकर अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है
अगर आपका बजट सीमित है, तो 2nd owner car लेने पर आप किसी बेसिक मॉडल की क़ीमत में एक प्रीमियम SUV या बेहतर सेगमेंट की कार भी ले सकते हैं।
1st और 2nd Owner Cars के बीच मुख्य अंतर
2nd owner और 1st owner used cars के बीच मुख्य फर्क मालिकाना इतिहास, गाड़ी की हालत और क़ीमत में होता है। जहाँ 1st owner cars ज़्यादा भरोसेमंद होती हैं और रीसेल में बेहतर रहती हैं, वहीं 2nd owner cars शुरुआती तौर पर सस्ती होती हैं लेकिन इनमें ज़्यादा सतर्कता ज़रूरी होती है। 2024 में भारत के used car बाज़ार में लगभग 63% कारें first-owner थीं, जबकि बाकी हिस्सेदारी second, third और उससे आगे के मालिकों वाली कारों की थी। आख़िरकार फैसला इस बात पर टिकता है कि आपके लिए क्या ज़्यादा अहम है—बेहतर हालत या शुरुआती बचत।
1st Owner Used Car खरीदने के फायदे
2025 में 1st owner used car लेने के कई फायदे हैं:
- पूरी सर्विस हिस्ट्री: आप यह देख सकते हैं कि कार में अब तक क्या-क्या सर्विस और मरम्मत हुई है, जिससे गाड़ी की हालत पर भरोसा बढ़ता है
- बेहतर ओवरऑल कंडीशन: आमतौर पर 1st owner cars में घिसावट कम होती है
- ज़्यादा रीसेल वैल्यू: भविष्य में बेचते समय ऐसी कारों की क़ीमत बेहतर मिलती है
- मानसिक शांति: छिपे हुए हादसों या अनचाही मॉडिफिकेशन की संभावना कम रहती है, क्योंकि कार के सिर्फ़ एक ही मालिक रहे होते हैं
2nd Owner Used Car खरीदने के फायदे
अगर आपका बजट तंग है, तो 2nd owner used car एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है। इसके फायदे इस प्रकार हैं:
- कम शुरुआती क़ीमत: समान मॉडल की 1st owner car की तुलना में सस्ती
- उसी बजट में बड़ी या बेहतर कार: उसी पैसों में ज़्यादा फ़ीचर्स या ऊँचे सेगमेंट की कार मिल सकती है
- बाज़ार में अच्छे विकल्प: सही तरीके से रखी गई कई 2nd owner cars आज भी बेहतरीन हालत में मिल जाती हैं
यहाँ सबसे ज़रूरी बात है कि गाड़ी की सर्विस हिस्ट्री, कंडीशन और पूरा रिकॉर्ड ध्यान से जांचा जाए, ताकि आगे चलकर कोई अप्रिय अनुभव न हो।
खरीदने से पहले किन बातों पर ध्यान दें
1st owner बनाम 2nd owner used car की तुलना करते समय ये बातें मददगार होंगी:
- पूरी जांच करें: माइलेज, गाड़ी की हालत और सर्विस रिकॉर्ड ज़रूर देखें
- हादसे या मॉडिफिकेशन की जांच: 2nd owner cars में मरम्मत या बदलाव की संभावना ज़्यादा होती है
- बजट बनाम भरोसा: अगर बजट इजाज़त देता है और आप भरोसे को प्राथमिकता देते हैं, तो 1st owner बेहतर है
- रीसेल की योजना: आप कार कितने समय तक रखने वाले हैं, यह सोचें—1st owner car आमतौर पर बेहतर वैल्यू बनाए रखती है
सावधानी: सिर्फ़ मालिकों की संख्या देखकर फैसला न करें
यह समझना भी ज़रूरी है कि कार के मालिकों की संख्या ही सब कुछ तय नहीं करती। कई बार कोई 2nd owner car, first-owner car से नई, कम चली हुई या बेहतर रख-रखाव वाली हो सकती है। मुमकिन है कि पहले मालिक ने कार को ज़्यादा चलाया हो और देखभाल कम की हो, जबकि दूसरे मालिक ने कम समय में उसे बेहतर तरीके से रखा हो।
इसलिए फैसला लेते समय सर्विस रिकॉर्ड, हादसों का इतिहास, माइलेज और गाड़ी की कुल हालत जैसे पहलुओं को बराबर तवज्जो देना ज़रूरी है।
सारांश
1st owner बनाम 2nd owner used car के बीच चुनाव आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। 1st owner car में भरोसेमंद सर्विस हिस्ट्री और भविष्य में बेहतर रीसेल वैल्यू का भरोसा मिलता है। वहीं 2nd owner car ज़्यादा किफ़ायती होती है और कम बजट में बेहतर सेगमेंट या ज़्यादा फ़ीचर्स वाली कार लेने का मौका देती है। माइलेज, हालत और सर्विस रिकॉर्ड की सही तुलना करके आप ऐसा फैसला ले सकते हैं जो आपके पैसों की पूरी क़ीमत वसूल करे।
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